रविवार, 27 जनवरी 2013

श्रीकृष्ण जन्मस्थान को लेकर विवाद


श्रीकृष्ण जन्म स्थान होने के कारण मथुरा स्थित जन्मभूमि वैसे तो देशी व विदेशी दोनों ही प्रकार के श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र रही है किन्तु विदेशी लोगों के अलावा कई देशी लोग भी इस बात से अभी तक अनभिज्ञ हैं कि जिस जन्मभूमि का दर्शन वह श्रीकृष्ण जन्मस्थान के रूप में कर रहे वह वास्तव में जन्मस्थान है भी या नहीं।

वर्तमान समय में जिस कारागार को कंस कारागार की संज्ञा दी जा रही है वह वास्तव में कंस कारागार नहीं है। यह कारागार 1962 में  बनी थी जो अब श्रीकृष्ण जन्मस्थान के नाम से प्रसिद्ध है।

वर्तमान समय में जिस भागवत भवन में श्रीकृष्ण का जन्म होता है वह मात्र 28 वर्ष पुरानी अर्थात 1984 में बना था जबकि जन्मस्थान के बाएं ओर बना कारागार ही वह कारागार है  जहाँ देवकी और वसुदेव के पुत्र श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था। वर्तमान समय में भी इस मंदिर में देवकी और वसुदेव की प्राचीन मूर्ति आज भी स्थापित है।

वैकल्पिक  श्रीकृष्ण जन्म स्थान मंदिर 
इस मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व सप्तमी की रात्रि अर्थात अष्टमी में ही किया जाता है। इस मंदिर में आज भी वह स्थान स्थापित है जहाँ  चैतन्य महाप्रभु जैसे विद्वानों ने आकर अपनी शक्ति व बल प्रयोग से इस स्थान का पता लगाने के लिए भजन किया था।

इस मंदिर में श्रद्धालुओं को उस स्थान के दर्शन भी आसानी से मिल सकते हैं जिस स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण का नार गाढ़ा गया था।  जन्मस्थान में दर्शन करने के लिए आने वाले काफी श्रद्धालुओं के लिए अभी यह मंदिर उनकी पहचान के बाहर मात्र इसलिए है क्योंकि इस मंदिर की उपेक्षा के लिए पास में ही नव जन्मस्थान का निर्माण हो चुका है।

इस मंदिर में उस योगमाया का मंदिर भी स्थापित है जो नंदबाबा और यशोदा की पुत्री थी जिसने कंस के हाथ से फिसलकर आसमान से कंस के मरने की आकाशवाणी की थी।

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