रविवार, 27 जनवरी 2013

भूतेश्वर महादेव मंदिर, मथुरा


जहाँ  एक ओर ब्रज में चार महादेव प्रसिद्ध  हैं जिसमें मथुरा में भूतेश्वर, कामां में कामेश्वर, गोवर्धन में चक्लेश्वर व वृंदावन में गोपेश्वर माने जाते हैं। वहीं दूसरी ओर मथुरा शहर में भी चार महादेव प्रसिद्ध हैं जिसमें पश्चिम में भूतेश्वर, पूर्व में पीपलेश्वर, उत्तर में गोकरननाथ तथा दक्षिण में रंगेश्वर का मंदिर स्थित है।

पश्चिम में स्थित भूतेश्वर महादेव को आत्मा अर्थात भूतों का ईश्वर बताया जाता है। मंदिर के इतिहास के बारे में यूँ तो कई कहानियों के रूप में इसका वर्णन किया जाता है किन्तु कुछ विद्वानों के अनुसार इतिहास को इस प्रकार भी बताया जाता है।

मधु व कैटभ नाम के दो दानव जन्म लेने के बाद भगवान विष्णु की नाभि से कमल पर चढ़ जाते हैं  जहाँ पर ब्रह्मा जी भजन में लीन रहते हैं। वह दोनों उनके भजन को भंग करते हुए उनको परेशान करने लगते हैं। ब्रह्मा जी द्वारा उनको कोई जबाव न मिलने पर वह ब्रह्मा जी को मारने को उतारु हो जाते हैं। बचाव में ब्रह्मा जी द्वारा चिल्लाने पर वहाँ  पहुँचे  विष्णु का युद्ध दानवों से हो जाता है। काफी समय युद्ध चलने के बाद भी उसका कोई निष्कर्ष न निकलने के कारण विष्णु प्रसन्न होकर कैटभ को वरदान देने की बात कहते हैं जिसे कैटभ स्वीकार न करके यह कह देता है कि तुम अभी युद्ध जीते नहीं हो इसलिए तुम्हारा वरदान देने का कोई अधिकार नहीं है। वह इसके विपरीत स्वंय विष्णु को वरदान देने की बात कहते हैं। वरदान की बात सुनकर विष्णु कैटभ से यह कह देते हैं कि तुम जिस इष्ट देव को मानते हो यदि तुम उस देव की तीन बार शपथ ले लो तो वह वरदान लेने को तैयार है। कैटभ द्वारा अपने इष्ट देव अर्थात शिव जी की तीन बार शपथ लेने के बाद विष्णु हाथ पसार कर कैटभ से अपना शीष काटकर देने की बात कहते हैं। मधु के आ जाने के बाद कैटभ कहता है कि भैया यदि अब हम युद्ध करेंगे तो हार जायेंगे  क्योंकि मैंने भगवान शिव की शपथ खाकर इन्हें शीष काटकर देने का वचन दिया है और मुझे विश्वास है कि तुम बाद में मेरा बदला जरुर पूरा करोगे। इसी कारण मधु ने इस स्थान पर आकर तपस्या की। तपस्या से प्रसन्न हुए शिवजी ने मधु को एक वरदान  माँगने को कहा मधु ने एक वरदान स्वीकार न करते हुए तीन वरदान माँगने की बात कहीं जिसे सुन शिवजी अन्तरध्यान हो गए। इसके बाद भी जब मधु अपनी तपस्या में लीन रहा तभी कैलाश पर्वत उसकी तपस्या के बल से हिलने लगा जिसे देखकर भगवान शिव ने कहा कि मैं तुम्हारे तीन वरदान देने के लिए तैयार हूँ  इसके अतिरिक्त मैं तुम्हें चौथा वरदान भी दूँगा। मधु द्वारा  माँगे गए वरदानों में प्रथम वरदान के रूप में यह बताया जाता है कि मधु का कहना था कि जिस विष्णु ने उनके भाई को छल  से मारा था वो  यहाँ का राजा बने, दूसरा वरदान यह था कि जिस ब्रह्मा ने सब कुछ पता होते हुए भी उन्हें कुछ नहीं बताया इसलिए वह चोर बने। तीसरा वरदान के रूप में उन्होंने शिवजी से यह  माँगा था कि वह संहार कर्ता के स्थान पर पालनकर्ता और रक्षा करने वाले बने। स्वंय अपनी ओर से शिवजी ने मधु को चौथे वरदान के रूप में त्रिशूल देते हुए कहा कि तीन लोक और चौदह वनों में कोई तब तक नहीं हरा पाएगा जब तक तुम्हारे हाथ में यह त्रिशूल रहेगा।
भूतेश्वर महादेव मंदिर, मथुरा

तभी से इसको आत्माओं का ईश्वर अर्थात भूतेश्वर नाम दिया गया। भूतेश्वर महादेव मंदिर पर एक आश्चर्य की बात यह भी देखने को मिलती है कि इस महादेव का  मुँह खुला हुआ है। यह महादेव राक्षसों के आराध्य देव माने जाते हैं। इस मंदिर की प्राचीनता का पता लगाना काफी कठिन है।

भूतेश्वर कोतवाल  यहाँ  के, केशव की ठुकराई है।
तीन लोक से न्यारी-प्यारी, भारी मधुपुरी बेदंगाई है।।

इस मंदिर में सावन के सोमवार, महाशिवरात्रि, नववर्ष, सावन की तीज व जन्माष्टमी पर्वो पर विशेष आयोजन किया जाता है। सावन के महीने में कांवडिय़ों द्वारा लाया गया जल इस शिवलिंग पर चढ़ाया जाता है। सावन में जेहर चढ़ाने आदि की परम्परा भी इस मंदिर से जुड़ी हुई है।

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