रविवार, 27 जनवरी 2013

भूतेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास

मथुरा में स्थित भूतेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास वैसे तो बहुत पुराना है किन्तु इसका इतिहास पता लगाने के लिए अनेक कथाएं सुनने  को मिल जाती है। एक ऐसी ही कथा द्वापर युग में जन्मे श्रीकृष्ण से जुड़ी हुई है।

जब श्रीकृष्ण का जन्म होता है और उन्हें मथुरा से गोकुल ले जाया जाता है तो  वहाँ भोलेनाथ (शिवजी) श्रीकृष्ण के दर्शन के लिए  पहुँचते हैं । भोलेनाथ का साधुवेशधारी रूप देखकर यशोदा उन्हें यह कह देती  हैं कि तू चाहे कितना भी हठ कर ले मैं तुझे अपने लाला  के दर्शन नहीं कराऊंगी। तू इस समय इतना भयानक लग रहा है कि तुझे देखकर मेरा लाला श्रीकृष्ण डर जाएगा क्योंकि वह अभी छोटा है। इतना सुनते ही भोलेनाथ वहाँ से तो चले जाते हैं किन्तु वह पास ही के वर के पेड़ के नीचे भजन करने बैठ जाते हैं। वहीं दूसरी ओर श्रीकृष्ण रोने लगते हैं तो यशोदा घबराकर अपने आसपास की सखियों को बुला लेती हैं  और उन्हें इस घटना से अवगत कराती हैं  कि एक साधु आया था जो लाला के दर्शन करने की कह रहा था। मेरे मना करने पर वह साधु तो चला गया किन्तु लाला तभी से रो रहा है। इतना सुनते ही यशोदा की सखियों ने आसपास के क्षेत्रों में भोलेनाथ की तलाश शुरु कर दी जिन्हें कुछ क्षण बाद ही पास में बैठे भोलेनाथ भजन करते दिखाई दे गए। उन्होंने भोलेनाथ से कहा कि हमारे लाला को नजर लग गई है तुम चलकर उसकी नजर उतार दो। सखियों द्वारा काफी मनाने के बाद भोलेनाथ दर्शन करने के लिए पहुंच गए जिन्होंने श्रीकृष्ण के तारण मंत्र की विभूति जैसे ही लगाई श्रीकृष्ण तत्काल ही मुस्करा गए तब यशोदा ने कहा कि बाबा तू  यहीं रुक जा और यदि  कभी मेरे लाला को नजर लग जाए तो तू उसे उतार दिया करियौ। भोलेनाथ बोले कि यदि भविष्य में कभी ऐसा हो तो तू उसे मथुरा के भूतेश्वर महादेव पर ले अइयौ मैं  वहीं विराजमान रहता हूँ । इतना कहकर ही भोलेनाथ वहाँ  से आकर यहाँ भूतेश्वर नामक स्थान पर विराजमान हो गए।

भूतेश्वर महादेव के इस मंदिर में उस  माँ उमा शक्ति पीठ का मंदिर भी स्थापित है  जहाँ शक्ति जी के केश गिरे थे। इसलिए इसे भूतेश भैरव भी कहा जाता है।

इस मंदिर में श्रद्धालु राज राजेश्वर महादेव, शनिदेव आदि मंदिरों के दर्शन भी कर सकते हैं। श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण  होने के कारण यहाँ प्रतिदिन आस्थावान लोगों का सैलाब उमड़ता है।

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