सोमवार, 28 जनवरी 2013

महाविद्या देवी मन्दिर, मथुरा

दसों  विद्याओं में  महाविद्या देवी सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। श्रीकृष्ण की कुलदेवी होने के कारण श्रीकृष्ण का मुण्डन भी इसी स्थान पर हुआ था।

श्रीकृष्ण जन्म से पूर्व के इस मंदिर में सरस्वती के स्वरूप में विराजमान महाविद्या  देवी के मंदिर के पास देवकी कुण्ड  स्थित है। इसका इतिहास कुछ इस तरह बताया जाता है कि श्रीधर नामक ब्राह्मण ने अंगिरा ऋषि का अपमान किया था जिसके फलस्वरूप अंगिरा ऋषि ने उसे अजगर होने का श्राप दिया था और कहा था कि त्रेता युग में अम्बिका वन (महाविद्या ) में जाकर तू अपना श्राप भोगेगा।

महाविद्या  देवी मन्दिर, मथुरा

देवकी-वसुदेव ने भी श्रीकृष्ण जन्म से पूर्व  यहाँ आकर मन्नत  माँगी थी कि श्रीकृष्ण का जन्म सकुशल होने पर वह  यहाँ आकर उनका मुण्डन करेंगे। श्रीकृष्ण का जन्म सकुशल होने के बाद देवकी ने पास ही बने कुण्ड में स्नान किया। स्नान करते समय श्रीधर रूपी अजगर ने देवकी का पैर जकड़ लिया। तब श्रीकृष्ण ने उस   साँप से अपनी   माँ को मुक्त कराकर उसका उद्धार किया।

बताते हैं  कि छत्रपति शिवाजी ने भी दिल्ली लूट की योजना इसी स्थान पर बनाई थी और यह मन्नत  माँगी थी कि यदि वह लूट में सफल होते हैं तो  यहाँआकर इस मंदिर का निर्माण कराएंगे।

नव दुर्गा व नर्ववर्ष के समय इस मंदिर में श्रद्धालु अपनी मन्नतें  माँगने के लिए आते हैं। अक्षय नवमी तथा देवोत्थान एकादशी पर लगने वाली परिक्रमा के दिन भी  यहाँ हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करते हैं।

इस मंदिर में शीतकाल में प्रतिदिन प्रात: 7 बजे व सांय 6.30 बजे तथा ग्रीष्मकाल में प्रात: 6.30 बजे तथा सांय 7.30 बजे आरती का आयोजन किया जाता है। दसों  विद्याओं में सर्वश्रेष्ठ  विद्या होने के कारण इसे महाविद्या  के नाम से जाना जाता है।

प्राचीन काल में इस मंदिर के पास बने कुण्ड को देवकी कुण्ड के नाम से जाना जाता था जबकि वर्तमान समय में यह कुण्ड  महाविद्या कुण्ड के नाम से प्रसिद्ध है।

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