सोमवार, 28 जनवरी 2013

काली माँ मन्दिर, मथुरा

मथुरा में महाविद्या  , चर्चिका, चामुण्डा, कैलादेवी,  बगलामुखी, कात्यायनी,चन्द्रावली  देवियों समेत नौ सिद्धपीठ व मंदिर हैं  पर आज  से लगभग ढाई दशक पहले  यहाँ  काली माँ का मंदिर नहीं था।

संवत् 2015 में मथुरा इलेक्ट्रिक सप्लाई कम्पनी के मैनेजिंग डायरेक्टर कालीचरन भगत के मन में माई का मंदिर बनाने का भाव जागृत हुआ तो उन्होंने यह बात अपने परम्परागत तीर्थ पुरोहित शिवलोकवासी मंहत मुकुन्दराम नौघर वालों के सामने रखी।

इसके फलस्वरूप गनेश प्रसाद चतुर्वेदी तथा पत्रकार नरेन्द्र मित्र से सलाहकर महाशिवरात्रि पर्व पर वैदिक रीति से माँ भगवती काली की स्थापना उक्त बिजली कम्पनी के पास हो गई जो अब वर्तमान समय में सिद्धपीठ  माँ काली मंदिर के रूप में प्रसिद्ध है।
काली माँ मन्दिर, मथुरा 

यध्यपि प्रारम्भ में मंदिर के विस्तार एवं भवन निर्माण में कई विघ्र बाधाएं  आईं किन्तु माई के रास्ते में आने वाली बाधाएँ  अवसर में तब्दील होती गई। मंदिर की स्थापना के बाद माई ने ब्रजवासियों पर ऐसी कृपा की कि जिसने जो  माँगा उसे वही मिला। इस कृपा की वर्षा के कारण ही शरदीय नवरात्रि एवं चैत्रमास के नवरात्रि में  यहाँ जूम जुड़ जाता है। यह माई के चमत्कार का ही प्रभाव है कि नवरात्रि के अलावा वर्ष पर्यन्त माई के दरबार में आने वालों का ताँता लगा रहता है।

इस मंदिर की विधिवत स्थापना के हालांकि अभी लगभग 25 वर्ष ही हुए हैं किन्तु माई के चमत्कारों से इसकी मान्यता सैकड़ों वर्ष पुराने मंदिर सी बन गई है। वर्तमान में इस मंदिर का विस्तार कर  यहाँ पर श्री गिरिराज जी, शिव परिवार, वीर हनुमान, भैंरो बाबा तथा क्षेत्रपाल मंदिर की स्थापना की गई किन्तु इस मंदिर की पहचान काली  माँ मंदिर के रूप में ही बनी हुई है।

इस मंदिर पर सन 2013 तक तीन यज्ञों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें 2007 में प्रथम पंचकुण्डीय सहस्त्र चण्डी महायज्ञ, 2011 में नवकुण्डीय सहस्त्र चण्डी महायज्ञ तथा वर्तमान सन 2013 में पुन: पंचकुण्डीय सहस्त्र चण्डी महायज्ञ का आयोजन हुआ है। इस बार पंचकुण्डीय महायज्ञ में योनिकुण्ड, चर्तुस्थ कुण्ड, अर्धचंद कुण्ड, पदम कुण्ड, वृत्त कुण्ड बनाए गए थे। इन कुण्डों के अर्थ कुछ इस प्रकार बताए जाते है कि योनि कुण्ड पुत्र प्राप्ति के लिए, चर्तुस्थ कुण्ड सिद्धों के लिए, अर्धचंद कुण्ड शुभफल सुख प्राप्ति के लिए, पदम कुण्ड लक्ष्मी प्राप्ति के लिए तथा वृत्त कुण्ड शान्ति प्राप्ति का प्रतीक होता है।

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