रविवार, 27 जनवरी 2013

विश्राम घाट, मथुरा

मथुरा में पूर्ण तीर्थ के रूप में स्थित विश्राम घाट का इतिहास वैसे तो काफी पुराना बताया जाता है किन्तु यदि इसकी वास्तविकता पर गहनता से प्रकाश डाला जाए तो इसके इतिहास से जुड़ी कहानी काफी रोचक प्रतीत होती है।

बताते  हैं कि जब मधु-कैटभ व हिरण्याकश्यप आदि राक्षस पृथ्वी को पाताल में ले गए थे तब वराह भगवान ने अवतरित होकर पृथ्वी को उन राक्षसों से मुक्त कराया था। इस घटना के बाद उन्होंने  यहीं अर्थात विश्राम घाट पर आकर आराम किया था तभी से इस घाट को विश्राम घाट के नाम से जाना जाने लगा।

मामा कंस का वध करने के बाद श्रीकृष्ण व बलराम ने भी  यहीं आकर विश्राम किया था इसलिए भी इसे विश्राम घाट के नाम से पहचाना जाता है।
विश्राम घाट, मथुरा

यह स्थल वह स्थान भी बताया जाता है जब वसुदेव श्रीकृष्ण को गोकुल ले जा रहे थे तब यहीं श्रीकृष्ण की पटरानी यमुना ने उनके चरण स्पर्श किए थे।

इसी स्थान पर यमुना जी ने अपने भाई धर्मराज से यह वरदान  माँगा था कि  यम द्वितीया के दिन यमुना जी में जो कोई भी भाई-बहन स्नान करेगा वह यम की फांस से मुक्त हो जाएगा।  यही कारण है कि प्रतिवर्ष यमद्वितीया के दिन लाखों की संख्या में विदेशी व देशी भाई-बहन  यहाँ आकर स्नान करते हैं 

कृष्णों नृशंस परिहत्य कंस, विश्रान्तवान् रामयुतो यतोत्व।
स्थान तोत्दोत्भत प्रसिद्धि, विश्रंति तीर्था भिघया धरायाम्।।
अर्थात - श्रीकृष्ण ने  परायों की पीड़ा हरने के लिए नृसिंह का सा रूप धारण कर कंस का वध किया। वध करने के बाद दोनों भाईयों (बलराम व श्रीकृष्ण) ने  यहींआकर विश्राम किया। तभी से यह स्थान विश्राम घाट के नाम से प्रसिद्ध है। उक्त श्लोक वर्तमान समय में भी इस घाट पर देखने को मिल जाता है।

84 कोस की परिक्रमा भी इसी स्थान से होकर गुजरती है। यमुना का तीर्थ भी विश्राम घाट ही बताया जाता है। इस स्थान पर ग्रीष्मकाल में प्रतिदिन प्रात: 5 बजे तथा सांय 7 बजे व शीतकाल में प्रतिदिन प्रात: 5.30 बजे व सांय 7.30 बजे आरती का आयोजन किया जाता है।
विश्राम घाट, मथुरा

विश्राम घाट पर वह स्थान भी बना हुआ है  जहाँ मृत्यु के पश्चात् लोगों को विश्राम दिया जाता है तत्पश्चात् उन्हें अंत्येष्टि के लिए ले जाया जाता है।

वैसे तो (भैया दूज) यम द्वितीया पर्व, श्रावण मास व अधिक मास में  यहाँ श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है किंतु वर्ष में भक्तों द्वारा कराए गए चुनरी मनोरथ व छप्पन भोग इत्यादि के आयोजनों के समय भी  यहाँ अच्छा-खासा भीड़ का नजारा देखने को मिल जाता है। इस स्थान पर भक्त यमुना जी, श्रीकृष्ण-बलराम, राधा-माधव, कुपजा श्रीकृष्ण, यमुना-धर्मराज, महाप्रभु की बैठक आदि मंदिरों के दर्शन भी कर सकते हैं।

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