मंगलवार, 28 जनवरी 2020

वसन्त पञ्चमी से बृज में मनेगा 40 दिवसीय होली पर्व


बृज के मन्दिरों में वसन्त पञ्चमी से होली की शुरुआत हो जायेगी। वसन्त पञ्चमी माघ मास की शुक्ल पक्ष पञ्चमी को मनायी जाती है वृन्दावन के बाँके बिहारी मन्दिर में 30 जनवरी को वसन्त पञ्चमी तिथि से भगवान और भक्तों के बीच होली खेली जायेगी। मन्दिर के सेवायत गोस्वामी देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं पर भगवान का प्रसादी गुलाल डालेंगे। उत्सव के दौरान उपस्थित भक्तजन भी उस गुलाल को अपने भगवान का प्रसाद समझकर भक्ति के रँग से सराबोर हो जाते हैं और जयकारे लगाने लगते हैं। बृज की होली का यह नजारा बाँके बिहारी मन्दिर सहित अन्य सभी प्रमुख मन्दिरों में 40 दिन, वसन्त पञ्चमी से धुलण्डी तक देखने को मिलेगा।

वृन्दावन स्थित बाँके बिहारी मन्दिर में वसन्त पञ्चमी के दिन गोस्वामी भगवान बाँके बिहारी का गुलाल से शृङ्गार करेंगे, जिसमें ठाकुरजी के गालों पर गुलाल लगाया जायेगा। बड़े-बड़े चाँदी के थालों में भरकर उनके सामने कई रँग के गुलाल सेवित (रखे) किये जायेंगे। इसके बाद ठाकुर बाँके बिहारी की सुबह 8.55 बजे होने वाली शृङ्गार आरती के समय और उसके बाद दोपहर को 12.55 बजे राजभोग आरती के बाद गोस्वामीजन भक्तों पर थालों से प्रसादी स्वरुप रँग-बिरंगे गुलाल डालेंगे यह सिलसिला धुलण्डी के दिन दोपहर को राजभोग आरती तक चलेगा। बाँके बिहारी मन्दिर के सेवायत अशोक गोस्वामी ने बताया की वसन्त पञ्चमी से बृज के मन्दिरों में होली की शुरुआत हो जायेगी 40 दिवसीय इस पर्व में 05 मार्च तक गुलाल या सूखे रंगों से होली खेली जायेगी। 06 मार्च को आंवला एकादशी, जिसे बृज में रँगभरनी एकादशी भी कहा जाता है, से टेसू के फूलों से बने रँग से होली की शुरुआत होगी। मन्दिरों में टेसू के फूलों के रँग के साथ अबीर-गुलाल भी श्रद्धालुओं पर डाला जायेगा। रँग की होली 10 मार्च को धुलण्डी की दोपहर तक मनायी जायेगी।

वृन्दावन के बाँके बिहारी जी मन्दिर में होली उत्सव 


वृन्दावन के राधावल्लभ मन्दिर में भी वसन्त पञ्चमी से गुलाल डाला जायेगा। गोस्वामियों द्वारा होली के पदों का गायन किया जायेगा। मन्दिरों के साथ-साथ कुञ्जों आश्रमों में भी सन्तों और भक्तों द्वारा समाज गायन किया जायेगा, जिसके अन्तर्गत होली पर आधारित पदों रसिक सन्तों की वाणियों का गायन किया जाता है। राधावल्लभ मन्दिर के सेवायत मोहित मराल गोस्वामी ने बताया की वसन्त पञ्चमी से राधावल्लभलाल की गर्मी की सेवा शुरू हो जायेगी सर्दियों में होने वाली नित्य अंगीठी सेवा वसन्त पञ्चमी से बन्द हो जायेगी साथ ही ठाकुर जी को ऊनी मोजेदस्ताने और गर्म वस्त्र पहनाना भी वसन्त पञ्चमी से बन्द हो जायेगा वसन्त पञ्चमी के दिन ठाकुरजी को केसरयुक्त बेसन के हलवे का भोग लगाया जायेगा वसन्त पञ्चमी के दिन से शुरू होने वाले होली उत्सव में पहले गर्भगृह में श्यामाश्याम होली खेलेंगे, उसके बाद उसी गुलाल प्रसाद को भक्तों में रँगभरनी एकादशी तक शृङ्गार और शयन आरती में डाला जायेगा रँगभरनी एकादशी से मन्दिर में रँग की होली शुरू हो जायेगी वसन्त पञ्चमी के दिन मन्दिर के गर्भगृह को पीले वस्त्र आदि से छतरी का रूप दिया जायेगा जो चारों ओर से खुली होती है।

मथुरा के द्वारकाधीश मन्दिर में वसन्त पञ्चमी के दिन पहले गुलाल को श्यामाश्याम के श्रीचरणों में रखकर भक्तों के कल्याण की कामना मन्दिर के मुखिया द्वारा की जायेगी, इसके बाद राजभोग में नित्य भक्तों पर यही गुलाल डाला जायेगा।

मथुरा के ही प्रसिद्ध श्रीकृष्ण जन्मस्थान के जनसम्पर्क अधिकारी विजय बहादुर सिंह के अनुसार जन्मस्थान स्थित केशवदेव मन्दिर समेत अन्य सभी मन्दिरों में वसन्त पञ्चमी के दिन जहां ठाकुरजी का बसन्ती शृङ्गार होगा वहीं ठाकुरजी को गुलाल अर्पित करने के बाद वही गुलाल भक्तों पर डाला जायेगा और होली का रसिया गायन इसी दिन से शुरू हो जायेगा

दानघाटी मन्दिर गोवर्धन के सेवायत पवन कौशिक के अनुसार वसन्त पञ्चमी के दिन इस बार जहां गिरिराज महाराज को पीले रँग के वस्त्र धारण  कराये जायेंगे वहीं उन्हें लगाया जाने वाला प्रसाद भी पीले रँग का होगा। मन्दिर में सजने वाला फूलबँगला भी पीले गेंदे के फूलों से ही तैयार किया जायेंगे

वसन्त पञ्चमी के दिन होली का डाढ़ा गाड़ा जायेगा जो इस बात का प्रतीक होता है कि आज से ही होली की शुरुआत हो गयी है। इस दिन श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर को पीले रँग के पुष्पों से सजाया जायेगा और श्रद्धालुओं में केसरिया खीर का प्रसाद वितरित किया जायेगा

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