बुधवार, 29 जनवरी 2020

बृज मण्डल में छायेगा होली का उल्लास – टेसू के रँग, गुलाल और लट्ठ से खेलेंगे होली

बृज मण्डल में 40 दिवसीय फाग महोत्सव का शुभारम्भ 29 जनवरी को वसन्त पञ्चमी से हो जायेगा। मन्दिरों में अबीर-गुलाल टेसू के फूलों के रँग की जमकर वर्षा होगी। मथुरा, वृन्दावन, गोकुल, महावन, नन्द गाँव, बरसाना और दाऊजी आदि स्थलों में होली पूरे उल्लास के साथ मनायी जायेगी। बृज में जगह- जगह तिराहे और चौराहों पर लकड़ी और गोबर के उपले रखकर होली का डाढ़ा गाढ़ा जायेगा, जिनका दहन 9 मार्च को होलिका दहन के साथ होगा। 4 मार्च को राधारानी की नगरी बरसाना में देशी-विदेशी श्रद्धालु लट्ठामार होली के साक्षी बनेंगे। इससे एक दिन पूर्व बरसना में ही लड्डू होली का आयोजन किया जायेगा।

होली के पारम्परिक गीत और रसिया जैसे आज बिरज में होरी रे रसिया..., नेक आगे श्याम तोपे रंग डारूँ..., मेरो खोय गयौ बाजूबन्द रसिया होरी में... आदि के स्वर मन्दिरों में सुनायी देंगे। वसन्त पञ्चमी के साथ ही बृज के मन्दिरों में चहुंओर होली का उल्लास दिखायी देगा। ठाकुर जी की सेवाओं में भी वसन्त पञ्चमी से बदलाव हो जायेगा। वहीं बरसाना में भी समाज गायन के साथ होली की शुरुआत हो जायेगी। नन्द गाँव के होरियारे बरसाना की हुरियारिनें अपनी तैयारियों में कई दिन पूर्व लग जाते हैं। बृज मण्डल में होली खेलने वाली महिलाओं को हुरियारिनें और पुरुषों को हुरियारे कहा जाता है 40 दिवसीय बृज के इस होली महोत्सव का समापन बलदेव (दाऊजी ) में  चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की दौज को हुरङ्गा के आयोजन के साथ होगा।

होली उत्सव में होंगे ये आयोजन -

27 फरवरी - महावन रमणरेती में होली
बृज क्षेत्र के महावन में यमुना तट पर स्थित रमणरेती में होली 27 फरवरी को पूरे उल्लास के साथ मनायी जायेगी। यहाँ प्रात: महामण्डलेश्वर गुरु शरणानन्द महाराज सर्व प्रथम जन-जन के आराध्य ठाकुर रमणबिहारी महाराज के चरणों में गुलाल अर्पण करेंगे इसके पश्चात् मन्दिर परिसर में गुलाल, रँग और गुलाब, गेंदाबेला के फूलों की पंखुड़ियों से होली खेली जायेगी। इस बीच भगवान राधा-कृष्ण की लीलाओं पर आधारित भजन, होली के पदों का गायन सन्त और भक्तों द्वारा किया जायेगा। उल्लास से परिपूर्ण इस महोत्सव का आनन्द लेने के लिए देश-विदेश से हजारों भक्तजन आयेंगे।

03 मार्च - बरसाना में लड्डू होली
बरसाना में श्री राधा रानी मन्दिर जो लाड़लीजी मन्दिर के नाम से भी जाना जाता है, में 3 मार्च को लड्डू होली खेली जायेगी, जिसमें मन्दिर के गोस्वामी राधा रानी का विशेष शृङ्गार करेंगे। मन्दिर में गोस्वामी तीर्थ पुरोहित के द्वारा होली के पदों और बृज की होली के पारम्परिक गीतों का गायन किया जायेगा। शाम को लगभग 5 से 6 बजे तक बून्दी, बेसन खोआ के लड्डू श्रद्धालु एक-दूसरे पर बरसायेंगे। मन्दिर के गोस्वामियों के अलावा देश के कोने-कोने से आने वाले भक्त भी होली खेलने के लिये अपने साथ लड्डू लाते हैं  और पूरे उल्लास के साथ एक-दुसरे पर लड्डू बरसाते हैं।

04 मार्च - बरसाना में लट्ठामार होली
बरसाना की रंगीली गली में प्रात: रँग गुलाल की होली खेलने के लिये बरसाना के तीर्थ पुरोहित पारम्परिक पोशाक पहन कर आयेंगे, जिसमें पुरुष पगड़ी, कुर्ता, धोती और महिलायें लहँगा, चुनरी पहनेंगी। रँग की होली खेलने के बाद शाम 5 बजे से लट्ठामार होली शुरू होगी। होरियारिनें लाठीयों से होरियारों पर वार करेंगी, जिसे होरियारे हाथों में लगी ढालों से बचाने का प्रयास करेंगे साथ ही होली के रसिया गायेंगे।

बरसाना की लट्ठामार होली  


05 मार्च - नन्द गाँव में लट्ठामार होली
नन्द गाँव में बरसाने से होरियारिनें होली खेलने के लिए जायेंगी। नन्द गाँव के होरियारे बरसाने की होरियारिनों के साथ नन्द बाबा के राज भवन और रंगीली चौक में लट्ठामार होली खेलेंगे इस दौरान होरियारे बृज के पारम्परिक गीत और रसिया गायेंगे और होरियारिनों पर रँग डालेंगे।

06 मार्च - रँगभरी एकादशी पर मथुरा के कृष्ण जन्मस्थान में होली
मथुरा के श्री कृष्ण जन्मस्थान मन्दिर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के मध्य होली का आयोजन होगा। सर्व प्रथम महामण्डलेश्वर गुरु शरणानन्द महाराज भगवान राधा-कृष्ण के स्वरूपों की पूजन और आरती करके होली महोत्सव का शुभारम्भ करेंगे इसके बाद भगवान राधा-कृष्ण की होली लीला का मंचन और बृज का चरकुला नृत्य, मयूर नृत्य बृज के ही कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया जायेगा। शाम को लगभग 5 से 6 बजे तक लट्ठामार होली खेली जायेगी। होली खेलने के लिए राधारानी की जन्म स्थली रावल गाँव से होरियारीनें और होरियारे पारम्परिक वेश में कृष्ण जन्म भूमि आयेंगे।

06 मार्च - रँगभरी एकादशी पर बाँके बिहारी मन्दिर में फूलों वाली होली
वृन्दावन के बाँके बिहारी मन्दिर में रँगभरी आंवला एकादशी के दिन 6 मार्च को भक्त और भगवान के बीच रँग, गुलाल और फूलों की होली होगी। सुबह की राजभोग सेवा के समय मन्दिर के गोस्वामीजन भक्तों पर भगवान बाँके बिहारी का प्रसादी गुलाल बरसायेंगे शाम को मन्दिर के पट खुलने के बाद 4:30 बजे श्रद्धालुओं पर मन्दिर के सेवकों द्वारा फूल बरसाये जायेंगे और इसके बाद गुलाल और रँग बरसाया जायेगा। मन्दिर के गोस्वामीजन बड़े-बड़े टोकनाओं में भरा टेसू के फूलों से बना रँग चाँदी की पिचकारियों से भक्तों पर बरसायेंगे 

वृन्दावन के बाँके बिहारी मन्दिर में फूलों से होली खेलते भक्त 


07 मार्च - वृन्दावन में विधवा माताओं की होली
वृन्दावन के प्राचीन मन्दिरों में से एक राधा गोपीनाथ मन्दिर में वृन्दावन में निवासरत विधवा मातायें होली खेलेंगी। सुलभ इण्टर नेशनल संस्थान द्वारा होली का आयोजन किया जायेगा। विधवा मातायें सर्व प्रथम अपने आराध्य ठाकुर राधा गोपीनाथ के चरणों में गुलाल और पुष्प अर्पित करेंगी, इसके बाद फूल, गुलाल से एक-दूसरे के साथ होली खेलेंगी। इस दौरान महिलायें भगवान राधाकृष्ण की लीला का भी मंचन करेंगी साथ ही हिन्दी और बांग्ला भाषा में लोक गीतों का गायन करेंगी। 

वृन्दावन में विधवा महिलायें होली खेलते हुये 


07 मार्च - गोकुल में छड़ीमार होली
मथुरा के निकट गोकुल में नन्द चौक पर स्थानीय महिलायें (होरियारिनें ) और पुरुष (होरियारे) छड़िमार होली खेलेंगे। गोकुल की महिलायें लहँगा-ओढ़नी पहनकर और शृङ्गार करके होली खेलने आयेंगे, वहीं पुरुष भी पारम्परिक पोशाक मे नजर आयेंगे। महिलायें पुरुषों पर प्रेम पगी छड़ियां मारेंगी। होरियारे छड़ियों से बचाव करते हुये लोक गीतों का गायन करेंगे।

09 मार्च - होलिका दहन
बृज में तिराहे और चौराहों पर वसन्त पञ्चमी पर गाड़ा गया डाढ़ा और होलिका का पूजन प्रात: महिलाओं द्वारा किया जायेगा। देर शाम उसका दहन किया जायेगा। इसके बाद बृजवासी अपने घर में होलिका दहन करेंगे।

10 मार्च - धुलण्डी
धुलण्डी के दिन दोपहर बृज के मन्दिरों, आश्रमों और घरों में रँग और गुलाल से बृजवासी एक-दूसरे के साथ होली खेलेंगे। मन्दिरों में रँग की होली राजभोग आरती तक होगी। मन्दिरों में गोस्वामियों द्वारा होली के पदों का गायन किया जायेगा मन्दिरों के साथ-साथ कुञ्जों, आश्रमों में भी समाज गायन सन्तों और भक्तों द्वारा किया जायेगा।

11 मार्च - दाऊजी का हुरङ्गा
दाऊजी के मन्दिर में चैत्र मास कृष्ण पक्ष की दौज तिथि पर 11 मार्च को हुरङ्गा का आयोजन किया जायेगा। स्थानीय महिलायें और पुरुष हुरङ्गा खेलने के लिये घरों से बाल्टी, लोटा लेकर मन्दिर में आयेंगे और मन्दिर के हौदाओं में भरा टेसू का रँग एक-दुसरे पर डालेंगे। होली की इस हुडदंग के बिच ही महिलायें होरियारों के पहने हुये कपड़ों को फाड़कर उनका पोतना (रँग में भीगा हुआ कपड़ा ) बनाकर होरियारों पर मारती हैं। इस दौरान मन्दिर के छज्जों से अबीर-गुलाल मन्दिर में होली खेल रहे बृजवासियों पर डाला जाता है। हुरङ्गा के सम्पन्न होने पर सभी होरियारे और हुरियारिनें दाऊजी की परिक्रमा लगाते हैं।

दाऊजी का हुरङ्गा


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