गुरुवार, 30 जनवरी 2020

वृन्दावन के बाँके बिहारी मन्दिर में भगवान के संग भक्तों ने खेली होली


वसन्त पञ्चमी से शुरू हुआ बृज का होली उत्सव चलेगा 40 दिनों तक


बृज में आज बृहस्पतिवार को वसन्त पञ्चमी पर 40 दिवसीय होली महोत्सव प्रारम्भ हुआ वृन्दावन के बाँके बिहारी मन्दिर में भक्त और भगवान के बीच गुलाल से होली खेली गयी देश-विदेश से आये हजारों भक्तों ने बृज की होली का आनन्द लिया। मन्दिर के सेवायत गोस्वामियों ने अपने आराध्य बाँके बिहारी महाराज को पीले रँग की पोशाक धारण करायी और गुलाल, केसर आदि से उनका शृङ्गार किया। इसके पश्चात् भगवान को सुगन्धित गुलाल सेवित किया गया इस अवसर पर मन्दिर को पीले गेंदे के फूलों से बनी झालर व झूमर से सजाया गया था

वृन्दावन के बाँके बिहारी मन्दिर में वसन्त पञ्चमी पर भक्तों पर गुलाल बरसाते मन्दिर के गोस्वामी  


भक्तों को रोमान्चित और उल्लास से भर देने वाली बृज की होली की शुरुआत वसन्त पञ्चमी के दिन सुप्रसिद्ध बाँके बिहारी मन्दिर में गुलाल की होली से हुयी। मन्दिर में दर्शन और भावमय आराधना के बीच भक्तों ने भगवान के साथ गुलाल और चन्दन से होली खेलकर भरपूर आनन्द लिया। प्रात: मन्दिर के पट खुलते ही भक्तजन बाँके बिहारी जी के संग होली खेलने मन्दिर में उमड़ पड़े। इस अवसर पर ठाकुर बाँके बिहारी ने कई रँग के गुलाल  और केसर के गुलचप्पे का शृङ्गार कर भक्तों को दर्शन दिये शृङ्गार आरती के साथ ही ठाकुरजी के प्रसाद के रुप में सेवायत गोस्वामियों ने भक्तों पर जमकर गुलाल बरसाया। प्रभु भक्ति के रँग में रँगे भक्त गुलाल में इस तरह  सराबोर हो गये कि वे अपनी सुधबुध भूल कर बाँके बिहारी जी के जयकारे लगाने लगे और मन्दिर भगवान के जयकारों से गुञ्जायमान हो गया। गोस्वामियों ने वसन्त के पदों का गायन कर अपने आराध्य बाँके बिहारी को रिझाया। भक्तों का मन मयूर बृज की होली की परम्परा को देख नृत्य करने लगा। 

मन्दिर के सेवायत आशीष गोस्वामी ने बताया कि वसन्त पञ्चमी से बाँके बिहारी मन्दिर में गुलाल की होली की शुरुआत हो गयी है। होली पर्व तक सुबह-शाम ठाकुरजी बाँके बिहारी भक्तों के साथ गुलाल की होली खेलेंगे। रँगभरनी एकादशी से ठाकुरजी टेसू के फूलों से बने गुनगुने रँग से होली खेलेंगे। आज से बृज मण्डल के मन्दिरों में होली की शुरुआत हो गयी है।

                       होली उत्सव की जानकारी देते मन्दिर के सेवायत आशीष गोस्वामी  
                                
बाँके बिहारी मन्दिर के साथ ही वसन्त पञ्चमी के अवसर पर वृन्दावन के राधास्नेह बिहारी मन्दिर, राधावल्लभ मन्दिर और प्राचीन सप्त देवालयों में भी गुलाल की होली खेली गयी। भक्तों ने विभिन्न मन्दिरों में जाकर अपने आराध्य के अनेक रुपों में दर्शन करने के साथ बृज की होली का भरपूर आनन्द लिया।



कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें