शुक्रवार, 31 जनवरी 2020

कात्यायनी देवी मन्दिर में वसन्त पञ्चमी पर हुआ सरस्वती पूजन


वृन्दावन के कात्यायनी मन्दिर परिसर में स्थित सरस्वती देवी मन्दिर में वसन्त पञ्चमी के अवसर पर पण्डितों द्वारा पूजन और अर्चना की गयी। साथ ही बच्चों और युवाओं ने पेन, पेंसिल और नयी कॉपी का पण्डितों से पूजन कराया। मन्दिर को पीले गेंदा के फूलों, रँग-बिरँगे गुब्बारों और विद्युत झालरों से सजाया गया। दर्शन और पूजन के लिए बड़ी सङ्ख्या में श्रद्धालु पँहुचे।

वसन्त पञ्चमी के अवसर पर सरस्वती देवी का पीले वस्त्र व फूलों से शृङ्गार किया गया 


सरस्वती देवी मन्दिर के गर्भ गृह से माँ सरस्वती की मूर्ति को मन्दिर के बरामदे में लाकर विराजमान किया गया। इसके पश्चात् माँ सरस्वती का मनोहारी शृङ्गार किया गया। पण्डितों द्वारा सामुहिक रूप से वन्दना की गयी। भक्तजनों ने देवी की मूर्ति पर गेंदे और सरसों के फूल अर्पित करके बेसन के लड्डू, सोहन पापड़ी, रेवड़ी, गजक आदि पीले रँग के पकवानों का भोग लगाया। बच्चे और युवा पूजन सामग्री के साथ पेन, पेंसिल, कॉपी, स्लेट लेकर मन्दिर आये और पण्डितों से उनका भी पूजन कराया।

वसन्त पञ्चमी पर स्कूल व कॉलेज के विद्यार्थी सरस्वती देवी का पूजन करने जाते हुये


युवाओं में यह मान्यता है की वसन्त पञ्चमी पर देवी सरस्वती के समक्ष पूजे गये पेन, पेंसिल का उपयोग परीक्षा के समय में करने से परीक्षार्थी अच्छे अंक प्राप्त करते है। इसीलिए सरस्वती देवी मन्दिर में युवाओं में पेन, पेंसिल का पूजन कराने की होड़ लगी देखी गयी। शाम के समय देवी सरस्वती की शयन आरती करने के बाद देवी की मूर्ति को पुनः गर्भ गृह में विराजित किया गया।

           आचार्य नर्मदेश्वर द्विवेदी वसन्त पञ्चमी पर मन्दिर में हुये आयोजन के बारे में बताते हुये 

आचार्य नर्मदेश्वर द्विवेदी ने बताया की वसन्त पञ्चमी पर मन्दिर में जीव मात्र के कल्याण के लिये देवी सरस्वती के पूजन के साथ श्री पञ्चमी भी आज होने पर माँ लक्ष्मी का भी आवाहन किया गया। देवी माँ से सभी के लिये धन-धान्य और सुख-सम्पत्ति की कामना की गयी।

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