मंगलवार, 11 फ़रवरी 2020

वृन्दावन के रँगजी मन्दिर में दस दिवसीय ब्रह्मोत्सव 12 मार्च से


वृन्दावन के सुप्रसिद्ध रँगजी मन्दिर में दस दिवसीय ब्रह्मोत्सव 12 से 21 मार्च तक विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के मध्य मनाया जायेगा। भगवान श्री गोदारँगमन्नार को समर्पित दक्षिण भारतीय शैली के रँगजी मन्दिर में वर्ष में एक बार होने वाले इस उत्सव की तैयारी मन्दिर प्रबन्धन द्वारा जोरो से की जा रही है।

श्री गोदारँगमन्नार को समर्पित इस दस दिवसीय ब्रह्मोत्सव में भगवान को प्रतिदिन स्वर्ण और रजत जड़ित सवारियों पर विराजित कर रँगजी मन्दिर से बड़ा बगीचा तक भ्रमण कराया जायेगा यह सवारियाँ प्रात: और संध्या के समय निकाली जायेंगी इन सवारियों के साथ दक्षिण भारतीय वाद्य यन्त्र, बैंडबाजे, हाथी और घोड़े भी शामिल होंगे मन्दिर के आचार्य और भक्तजन भगवान की सवारी के साथ-साथ चल कर उत्सव का आनन्द लेंगे।

वृन्दावन के श्री रँगजी मन्दिर में भगवान गोदारँगमन्नार 


दस दिन सोने और चाँदी से जड़ित विभिन्न सवारियों पर भगवान देंगे दर्शन



12 मार्च - प्रात: 8 से 11 बजे तक - भगवान श्री गोदारँगमन्नार स्वर्ण जड़ित पूर्ण कोठी की सवारी पर और संध्या में 7 से 10:30 बजे तक सिंह की सवारी पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे।

13 मार्च - प्रात: 8 से 11 बजे तक - सूर्यप्रभा की सवारी पर और संध्या के समय में 7 से 10 बजे तक हंस की सवारी पर विराजमान होकर भ्रमण करेंगे।

14 मार्च - प्रात: 7 से 10:30 बजे तक - गरुण वाहन पर और संध्या में 7 से 10 बजे तक हनुमानजी की सवारी करेंगे। संध्या में भगवान की सवारी रँगजी मन्दिर के बगीचे में पहुँचेगी। बगीचे में भगवान कुछ समय विश्राम करेंगे। इस दौरान आतिशबाजी की जायेगी।

15 मार्च - प्रात: 8 से 11 बजे तक - भगवान शेषनाग की सवारी पर और संध्या में 7:30 से रात्री 10:30 बजे तक कल्प वृक्ष की सवारी पर विराजित होंगे।

16 मार्च - प्रात: 8 बजे से मध्यान 2 बजे तक - चाँदी की पालकी में भगवान नगर के बगीचों में भ्रमण करेंगे और संध्या के समय 7:30 से 10:30 बजे तक सिंह शार्दूल की सवारी करेंगे।

17 मार्च - संध्या 4 से 6 बजे तक - भगवान काँच के विमान में विराजमान होकर भक्तों के साथ होली खेलेंगे, इसके बाद रात्री में 9:30 से 12 बजे तक हाथी की सवारी पर मन्दिर से बड़े बगीचे जायेंगे और बगीचे से भगवान पुनः मन्दिर आयेंगे।

18 मार्च - प्रात: 7:30 से मध्यान 3 बजे तक - 60 फुट ऊँचे रथ पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे। ब्रह्मोत्सव के इस कार्यक्रम को स्थानीय भक्तजन रथ का मेला के नाम से जानते हैं।

19 मार्च - संध्या समय 7 से रात्री 10:30 बजे तक - भगवान स्वर्ण जड़ित घोड़े की सवारी करेंगे। भगवान की सवारी के बड़े बगीचे में पहुँचने पर बगीचे के बाहर आतिशबाज़ी की जायेगी, स्थानीय भक्तजन इसे बड़ी आतिशबाजी के नाम से जानते हैं।

20 मार्च - प्रात: 7:30 से 10:30 बजे तक - भगवान चाँदी से जड़ित पालकी में विराजित होकर भक्तों को दर्शन देंगे और मध्यान 12 से 3 बजे तक भगवान श्री अव्भ्रथा स्नान करेंगे। संध्या समय में 8 से 11:30 बजे तक भगवान चाँदी से जड़ी चन्द्रप्रभा की सवारी पर भ्रमण करेंगे।

21 मार्च - रात्री में 10:30 से 12:30 बजे तक- भगवान श्री गोदारँगमन्नार पुष्पक विमान में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे।

मन्दिर की मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनघा श्रीनिवासन ने बताया कि दक्षिण भारतीय शैली के विशाल रँगजी मन्दिर में मुख्य अर्चविग्रह श्री भगवान गोदारँगमन्नार हैं। श्री गोदा देवी, जिन्हें दक्षिण में आण्डाल कहा जाता है, भगवान रँगमन्नार जिन्हें रँगनाथ भी कहा जाता है की अर्द्धांगिनी देवी हैं। ब्रह्मोत्सव में 10 दिन प्रात: और संध्या के समय भगवान गोदारँगमन्नार विभिन्न लीलाओं में तरह-तरह की सोने और चाँदी की सवारियों में विराजित होकर भक्तों को दर्शन देते हैं।


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