सोमवार, 24 फ़रवरी 2020

भगवान गोपेश्वर महादेव ने 16 शृङ्गार करके गोपी रूप में दिये दर्शन

गोस्वामियों ने खप्पर पूजन कियाकढ़ी,चावल और व्यजनों का भोग लगाया  


वृन्दावन के गोपेश्वर महादेव मन्दिर में महा शिवरात्रि के बाद फाल्गुन अमावस्या तिथि को भगवान ने 16 शृङ्गार  करके गोपी रूप में भक्तों को दर्शन दिये। मन्दिर के गोस्वामियों ने भगवान को चाँदी का खप्पर धारण कराया और खप्पर पूजन किया। वर्ष में एक बार होने वाले विशेष दर्शन के लिये देर रात तक भगवान गोपेश्वर महादेव मन्दिर में भक्तों की भीड़ लगी रही।

                       16 सोलह शृङ्गार कर गोपी रूप में भक्तों को दर्शन देते गोपेश्वर महादेव
फाल्गुन अमावस्या यानि खप्पर भरनी अमावस्या को प्रात: गोपेश्वर महादेव मन्दिर के गोपाल गोस्वामी और पवन गोस्वामी के सानिध्य में मन्त्रोच्चारों के मध्य गोस्वामीजन और भक्तों ने पंचामृत दूधदहिघृतशहद और शक्खर से अभिषेक किया गया। इसके पश्चात भगवान गोपेश्वर महादेव को खसकेवड़ा का इत्र लगाकर नवीन गुलाबी रँग की पोशाक धारण करायी गयी। भगवान शिव का गोपी के रूप में 16 शृङ्गार किया गया। मन्दिर के गोस्वामियों ने भगवान गोपेश्वर महादेव को चाँदी का खप्पर धारण कराकर खप्पर का पूजन किया। खप्पर को भरने के बाद भगवान गोपेश्वर महादेव के लिए मन्दिर की रसोयी में तैयार प्रसाद निवेदित किया। प्रसाद में  कढ़ी,चावलदालरोटीपकवानफलमेवा आदि शामिल किये गये थे। भगवान गोपेश्वर महादेव मन्दिर में खप्पर पूजन के विशेष दर्शन के लिये बड़ी संख्या में भक्तजन मन्दिर पहुँचे।
वहीं मथुरा के सुप्रसिद्ध भूतेश्वर महादेवरँगेश्वर महादेव आदि प्राचीन शिव मन्दिरों में भी फाल्गुन माह की अमावस्या को भगवान शिव का अभिषेक करने के पश्चात नवीन पोशाक धारण करायी गयी और मनमोहक शृङ्गार किया गया। शृङ्गार आरती की गयी। इसके बाद मन्दिर के महन्तों ने खप्पर पूजन किया। अपने आराध्य के दर्शनों के लिये शिव मन्दिरों भक्तजन देर शाम तक आते रहे। भगवान शिव के मन्दिर हर हर महादेव के जयकारों से गुंजायमान हो गये।
गोपेश्वर महादेव मन्दिर के श्री गोपाल गोस्वामी ने बताया कि महा शिवरात्रि के पश्चात खप्पर पूजन का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान शिव के साथ अन्नपूर्णा देवी का पूजन किया गया है और इसके बाद भगवान गोपेश्वर महादेव का खप्पर विभिन्न प्रकार के व्यजनों से भरा गया है। मन्दिर में इस धर्म परम्परा का वर्ष में एक बार निर्वाह फाल्गुन माह की अमावस्या तिथि को किया जाता है।




कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें