मंगलवार, 4 फ़रवरी 2020

महा शिवरात्रि पर 4 प्रहर में होंगे गोपेश्वर महादेव के महाभिषेक और महा आरती

सन्ध्या में नित दिन गोपी रूप में दर्शन देते हैं भगवान शिव 


बृज के प्राचीन और प्रमुख शिवालयों में से एक वृन्दावन के गोपेश्वर महादेव मन्दिर में फाल्गुन माह शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी पर 21 फरवरी को महा शिवरात्रि पर्व विभिन्न धार्मिक आयोजनों के मध्य मनाया जायेगा। रात्रि के 4 प्रहरों में भगवान गोपेश्वर के 4 महा अभिषेक और 4 ही महा आरती की जायेंगी।

महा शिवरात्रि के उपलक्ष्य में मन्दिर में सजावट और पञ्चामृत से अभिषेक से लेकर दुग्धाभिषेक और जलाभिषेक की तैयारियां होने लगी हैं। वहीं मन्दिर के सेवायत अधिकारियों ने पर्व के दिन पूजन और आरती के समय की रुपरेखा तैयार कर ली है। मन्दिर 24 घण्टे खुला रहेगा। वहीं जिन महिलाओं का हाल ही में विवाह हुआ है या फिर सन्तान हुयी है, वह महिलायेँ मन्दिर में आकर महादेव को जेहर चढ़ायेंगी। जेहर यानि बृज में विवाह संस्कार होने या सन्तान सुख की प्राप्ति होने पर शिवरात्रि पर बैंड बाजों के साथ महिला सज-धज कर सिर पर मंगल कलश रखकर शिवालय में जाती है। मंगल कलश में भरे यमुना जल से भगवान शिव का अभिषेक कर मंगल गीतों के साथ पूजन करती है। वहीं शिव भक्त प्रात: से संध्या तक काँवड़ में लाये गये यमुना जल और गंगा जल से अभिषेक करेंगे।

वृन्दावन स्थित गोपेश्वर महादेव


मन्दिर के सेवायत अधिकारी रामगोपाल गोस्वामी ने बताया कि 21 फरवरी को मन्दिर में महा शिवरात्रि पर रात्रि में जागरण किया जायेगा। इस दौरान मन्दिर के गोस्वामियों द्वारा रात के चारों प्रहरों में पञ्चामृत यानि दूध, दहि, घृत, शहद और शक्कर से महाभिषेक किया जायेगा। प्रत्येक महाभिषेक के बाद भगवान गोपेश्वर महादेव का सोलह शृङ्गार किया जायेगा, जिसमें भगवान को सोने, चाँदी के आभूषण और नवीन पोशाक धारण करायी जायेगी। शृङ्गार के बाद महा आरती होगी। सेवायत अधिकारी ने बताया की 23 फरवरी को खप्पर पूजन किया जायेगा, जिसमें महादेव के खप्पर का पूजन कर उसे भरा जायेगा। इसके बाद साधु, सन्यासियों को भोजन प्रसाद कराया जायेगा।


रात्रि में महाभिषेक और महा आरती का समय


प्रथम प्रहर - 10 बजे
द्वितीय प्रहर - 12 बजे
तृतीय प्रहर - 2 बजे
चतुर्थ प्रहर - 4 बजे

महारास देखने को बृज में भगवान शिव ने धारण किया था गोपी रूप


                          सेवायत राम गोपाल गोस्वामी गोपेश्वर मन्दिर की विशेषता पर प्रकाश डालते हुये 

गोपेश्वर महादेव मन्दिर के सेवायत अधिकारी राम गोपाल गोस्वामी ने बताया की द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने राधारानी और गोपियों के साथ वृन्दावन के यमुना तट पर महारास किया था। दिव्य महारास में किसी भी पुरुष का प्रवेश वर्जित था। महारास के दौरान जब कैलाश पर्वत पर भगवान शिव ने श्री कृष्ण की मुरली की तान सुनी तो उन्हें भी बृज में जाकर महारास देखने की इच्छा हुयी। जटाधारी भगवान शिव महारास स्थल में प्रवेश करने लगे तो उन्हें बृज की गोपियों ने बाहर ही रोक दिया जबकि देवी पार्वती को प्रवेश मिल गया। जब महादेव ने गोपियों से भगवान के महारास देखने की इच्छा के बारे में बताया और विनती की तो गोपियों ने यमुना महारानी की सहायता लेने का मार्ग दिखाया। भगवान शिव ने यमुना स्नान किया। यमुना महारानी ने भगवान शिव को महिलाओं के वस्त्र धारण करने के लिये दिये और उनका शृङ्गार किया। भगवान शिव गोपी रूप धारण कर महारास में शामिल हुये। तभी से भगवान शिव का नाम गोपेश्वर महादेव हो गया और वह गोपेश्वर भगवान के नाम से वृन्दावन में ही विराजित हो गये। तभी से वृन्दावन के गोपेश्वर मन्दिर में भगवान शिव का प्रातः अभिषेक व सन्ध्या में गोपी रूप में शृङ्गार किया जाता है।

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