बुधवार, 5 फ़रवरी 2020

ठाकुर राधा नयनानन्द महाराज का मना 400 वां प्राकट्य महोत्सव

वृन्दावन के पत्थरपुरा स्थित बड़ी सूरमा कुञ्ज में ठाकुर राधा नयनानन्द महाराज का 400 वां प्राकट्य महोत्सव विभिन्न धार्मिक आयोजनों के मध्य मनाया गया। इस अवसर पर ठाकुर राधा नयनानन्द का कुञ्ज के महन्त द्वारा पञ्चामृत से अभिषेक किया गया। सन्तजनों ने भक्ति पर आधारित विचार प्रस्तुत किये। वहीं सुदूर क्षेत्रों से आये भक्तजनों ने रासलीला और गौराङ्ग लीला का मञ्चन देख भक्ति रस का आनन्द लिया।

ठाकुर राधा नयनानन्द महाराज 


सप्त दिवसीय प्राकट्य महोत्सव में चतु: वैष्णव सम्प्रदाय के महन्त फूलडोल बिहारी दास महाराज के सानिध्य में मन्त्रोच्चारों के साथ धर्म ध्वजा स्थापित की गयी। आचार्य विष्णुकान्त शास्त्री द्वारा मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया। झांझ, मँजीरा और शंखध्वनि के मध्य महन्त प्रेमदास शास्त्री ने ठाकुर राधा नयनानन्द महाराज का पञ्चामृत से अभिषेक कर शृङ्गार आरती की। इसके पश्चात् विद्वत संगोष्ठी में बृज के सन्त, महन्त और आचार्यों ने कृष्ण रस, राधा रस और भक्ति के स्वरूपों पर विचार प्रस्तुत किये। शाम को भगवान राधाकृष्ण की निकुञ्ज लीला और गौराङ्ग लीला का मंचन बृज के कलाकारों द्वारा किया गया।

                                     महोत्सव के दौरान कृष्ण लीला का मंचन करते कलाकार 

महन्त प्रेमदास शास्त्री ने बताया की 400 वर्ष पहले बड़ी सूरमा कुञ्ज में साधना करते हुये और प्रिया-प्रियतम के दर्शनों की अभिलाषा में रोते-रोते श्री महन्त आचार्य मुन्मुकुन्द दास की नेत्र-ज्योति चली गयी थी। तब राधारानी प्रकट हुयी और मुन्मुकुन्द दास की आँखों में काजल लगाकर उन्हें दिव्य दृष्टि प्रदान की और अपने दर्शन दिये। 1620 ईसवीं में राधारानी ने अपने हृदय कमल से प्रकट प्रिया- प्रियतम का श्री विग्रह आचार्य मुन्मुकुन्द दास को प्रदान किया, जो आज भी बड़ी सूरमा कुञ्ज में ठाकुर राधा नयनानन्द महाराज के रूप में विराजमान है।


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