शनिवार, 1 फ़रवरी 2020

हस्त लिखित 405 वर्ष पुराने ग्रन्थ की नित दिन सन्त, महन्त करते हैं पूजन


गौड़ीय सम्प्रदायाचार्य स्वामी श्री कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा हस्तलिखित 405 वर्ष पुरानी पाण्डुलिपियों के रूप में चैतन्य चरितामृत ग्रन्थ वृन्दावन स्थित बड़ी सूरमा कुञ्ज में संरक्षित है। सन्त और महन्तों द्वारा बड़ी सुरमा कुञ्ज में भगवान के श्री विग्रहों के समान चैतन्य चरितामृत ग्रन्थ का पूजन और आरती प्रतिदिन की जाती है

बांग्ला लिपि में हस्त लिखित चैतन्य चरितामृत ग्रन्थ 

लाल वस्त्र में सुरक्षित रखा प्राचीन ग्रन्थ 



काँच के सन्दूक में सुरक्षित ग्रन्थ 


चैतन्य महाप्रभु के अनुयायि श्री रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के शिष्य श्री कृष्णदास कविराज गोस्वामी ने चैतन्य चरितामृत ग्रन्थ की रचना करके भक्ति साहित्य में नया अध्याय जोड़ दिया। श्री कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा पूर्व में रचित चैतन्य भागवत, चैतन्य मंगल और श्री कृष्ण चैतन्य चरितामृत आदि ग्रन्थों में चैतन्य महाप्रभु की जिन लीलाओं का वर्णन नहीं हुआ है, उन लीलाओं को उन्होंने अपनी अमर कृति चैतन्य चरितामृत में विस्तार से किया है। इस ग्रन्थ में विशेषकर राधा-कृष्ण तत्व के अतिरिक्त प्रेम तत्व, भक्ति तत्व, सन्त वैराग्य लीला, धाम सेवा लीला और भगवान कृष्ण का माधुर्य समाहित है। गौड़ीय जगत के देवतुल्य चैतन्य चरितामृत ग्रन्थ में कविराज गोस्वामी ने अनन्य रस के साथ समस्त भक्ति रस से सम्बन्धित विषयों को रखा है। यही कारण है की वैष्णव जन इस ग्रन्थ को भक्ति सिद्धान्तों और प्रेम रस तत्वों का सार संग्रह भी कहते हैं। 

                               महन्त प्रेम दास शास्त्री ग्रन्थ के इतिहास के बारे में बताते हुये 

बड़ी सुरमा कुञ्ज के महन्त प्रेम दास शास्त्री ने बताया की प्राचीन हस्तलिखित चैतन्य चरितामृत ग्रन्थ में संस्कृत भाषा में 1012 श्लोक के साथ बांग्ला भाषा में 10503 श्लोकों को मिलाकर कुल 11515 श्लोक हैं इस ग्रन्थ को गौड़ीय सम्प्रदाय के सन्त, महन्त और भक्त जन महापुराण श्रीमद भागवत की तरह मानते हैं, इसलिए  चैतन्य चरितामृत ग्रन्थ का पूजन वर्तमान में भी किया जाता है।


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