मंगलवार, 4 फ़रवरी 2020

वृन्दावन में ठाकुर राधादामोदर का 478 वां प्राकट्य महोत्सव धूमधाम से मना

वृन्दावन के प्राचीन सप्त देवालयों में से एक राधादामोदर मन्दिर में ठाकुर राधादामोदर महाराज का 478 वां प्राकट्य महोत्सव आज माघ शुक्ल दशमी तिथि को विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के मध्य मनाया गया। गोस्वामियों ने राधादामोदर का पञ्चामृत से अभिषेक किया। देशी-विदेशी भक्तों ने फूल बँगला और छप्पन भोग के साथ विराजित ठाकुरजी के दर्शन का भरपूर आनन्द लिया।


ठाकुर राधादामोदर मन्दिर में आयोजित प्राकट्य महोत्सव पर पीले वस्त्र और शृङ्गार में दर्शन देते ठाकुर जी  


ठाकुर राधादामोदर महाराज के प्राकट्य महोत्सव पर सेवकों ने पीले रँग के गुब्बारे और गेंदे के फूलों से मन्दिर को सजाया। मन्दिर के दामोदर गोस्वामी कृष्णबलराम गोस्वामी ने गर्भ गृह में विराजमान ठाकुर राधादामोदर के चल विग्रह का मन्त्रोच्चारों और शन्ख ध्वनि के मध्य पञ्चामृत दूध, दही, घृत, शहद, शक्कर से महाभिषेक  किया। इसके बाद ठाकुरजी और उनकी सहचरियों ने भक्तों को मनोहारी शृङ्गार में दर्शन दिए। देशी-विदेशी भक्तों ने महा मन्त्र हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे...के जाप और  हरिनाम संकीर्तन के साथ मन्दिर की 4 परिक्रमा लगायी। परिक्रमा के दौरान भक्ति सङ्गीत की धुनों पर भक्तजनों ने भावपूर्ण नृत्य किया। शाम को ठाकुरजी ने पीले रँग की पोशाक धारण की और पीले ही रँग के पुष्पों से सजे फूल बँगले में विराजित होकर भक्तों को छप्पन भोग के साथ दर्शन दिये। अपने आराध्य की एक झलक पाने को भक्तजन आतुर दिखे।

मन्दिर के गोस्वामी ठाकुर राधादामोदर जी का पञ्चामृत से अभिषेक करते हुये  

                              महोत्सव के दौरान महिला भक्त बधाई गीत गाते हुये 

मन्दिर के सेवायत दामोदर गोस्वामी ने बताया कि ठाकुर राधादामोदर का प्राकट्य कलियुग पावनावतारी  चैतन्य महाप्रभु के कृपापात्र श्रील जीव गोस्वामी की कड़ी साधना से आज के दिन 478 वर्ष पूर्व हुआ था। इसके पश्चात् जीव गोस्वामी महाराज ने 1542 ईसवीं में मन्दिर को स्थापित किया।

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