बुधवार, 12 फ़रवरी 2020

महा शिवरात्रि पर भगवान महाकाल 9 दिन तक भक्तों को 9 रूपों में दर्शन देंगे


13 फरवरी से शुरू होगा शिव नवरात्रि का उत्सव   


उज्जैन में विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मन्दिर में 21 फरवरी को महा शिवरात्रि पर्व मनाया जायेगा। उससे पहले 13 फरवरी से शिव नवरात्रि का उत्सव शुरू होगा, जिसके अन्तर्गत राजाधिराज भगवान महाकाल 9 दिन तक भक्तों को नौ विभिन्न रूपों में दर्शन देंगे। 13 से 21 फरवरी तक मन्दिर के गर्भ गृह में प्रात: 9 से मध्यान 01 बजे तक श्री महाकालेश्वर भगवान का 11 ब्राह्मणों द्वारा विशेष पूजन व अभिषेक किया जायेगा। श्री महाकालेश्वर जिन्हें उनके परम भक्त राजा कहकर भी पुकारते हैं, उनका संध्या के समय दिव्य शृङ्गार किया जायेगा। मन्दिर परिसर में स्थित मार्बल चबूतरे पर प्राचीन समय से चली रही परम्परा के अनुसार रमेश श्रीराम कानड़कर द्वारा नारदीय संकीर्तन के साथ कथा की जायेगी। महा शिवरात्रि पर्व को लेकर मन्दिर को विद्युत झालरों से सजाया जायेगा।

श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, उज्जैन 


मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मन्दिर के पुजारी प्रदीप गुरु ने बताया कि ज्योतिर्लिंग की परम्परा के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि से शिव नवरात्रि के रूप में महा शिवरात्रि पर्व का शुभारम्भ होता है। इस बार 13 फरवरी गुरुवार से महा पर्व की शुरुआत होगी।

गुरुवार प्रात: 8 बजे कोटितीर्थ कुण्ड के समीप स्थित श्री कोटेश्वर महादेव मन्दिर में भगवान कोटेश्वर की पूजा अर्चना की जायेगी। इसके पश्चात प्रात: 9:30 बजे मन्दिर के गर्भ गृह में भगवान महाकाल का पूजन आरम्भ होगा। भगवान महाकाल का 11 ब्राह्मणों द्वारा पञ्चामृत से एकादशनी रुद्राभिषेक किया जायेगा। भगवान महाकाल के पूजन का यह क्रम पूरे नौ दिन तक चलेगा। संध्या के समय भगवान का अलग-अलग रूपों में शृङ्गार किया जायेगा।


आरती और पूजन के समय में बदलाव


महा शिवरात्रि पर्व पर भोग, आरती और संध्या पूजन के समय में बदलाव किया गया है। सुबह 10:30 बजे होने वाली भोग आरती शिव नवरात्रि के नौ दिन दोपहर 1:00 बजे के बाद की जायेगी। प्रतिदिन शाम 5:00 बजे होने वाली संध्या आरती महा शिवरात्रि महोत्सव के इन नौ दिनों में दोपहर 3:00 बजे होगी।


पुजारी करेंगे व्रत


जिस तरह देवी के उपासक चैत्र और शारदीय नवरात्रि में व्रत करते हैं, उसी तरह भगवान शिव के आराधक शिव नवरात्रि में नौ दिन 13 से 21 फरवरी तक व्रत करेंगे। महाकाल मन्दिर के पुजारियों का भी उपवास रहेगा। 22 फरवरी को दोपहर 2:00 बजे प्रवचन हॉल में मन्दिर समिति द्वारा पारायण का आयोजन किया जायेगा, जिसमें मन्दिर के अधिकारी पुजारियों को भोजन कराकर दक्षिणा आदि भेंट करेंगे।

 

9 दिन इन रूपों में होंगे राजाधिराज भगवान महाकाल के दर्शन


13 फरवरी - भगवान महाकाल को सोला, दुपट्टा और जलाधारी पर मेखला धारण कराई जायेगी। भगवान को चाँदी का मुकुट,मुंडमाल धारण कराकर चन्दन का शृङ्गार किया जायेगा।
14 फरवरी - भगवान महाकाल शेषनाग के रूप में दर्शन देंगे।
15 फरवरी - घटाटोप यानि घनघोर बादलों की छायी घटा 
16 फरवरी - छबीना यानि डेरा डाले हुये स्वरूप में
17 फरवरी - होल्कर
18 फरवरी - मनमहेश
19 फरवरी - उमा महेश
20 फरवरी - शिव तांडव रूप में शृङ्गार

22 फरवरी - प्रात: 4 बजे भगवान सप्तधान के रूप में शृङ्गार होगा,जिसमें भगवान के शीश पर 50 किलो फूल और फल का सेहरा सजाया जायेगा।

25 फरवरी को भगवान महाकाल के पंच मुखारविंद दर्शन होंगे। महा शिवरात्रि के बाद चन्द्र दर्शन की दूज पर भगवान का पाँच मुखारविंद रूप में शृङ्गार होगा। भक्तों को भगवान महकाल के एकसाथ पाँच रूपों के दर्शन होंगे। वर्ष में एक बार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की दूज को भगवान के विशेष दिव्य दर्शन होंगे।

प्रोटोकॉल और 1500 की रसीद पर गर्भ गृह में 4 घण्टा प्रवेश


महा शिवरात्रि पर्व पर प्रोटोकॉल की स्थिति में और 1500 रुपये की रसीद पर पुजारी और पुरोहितों के यजमानों को 4 घण्टे प्रवेश मिलेगा। मन्दिर के प्रशासक सूजान सिंह रावत ने बताया की महा शिवरात्रि पर विशेष पूजन के चलते प्रात: 7:45 से 9:45 और दोपहर 2 से 4 बजे तक निर्धारित दर्शन व्यवस्था स्थगित की गयी है। नयी व्यवस्था के अनुसार प्रोटोकॉल और 1500 की रसीद वाले यजमानों को 13 से 20 फरवरी तक प्रतिदिन प्रात: 8:15 से 9:15, दोपहर 1:30 से 2:30 और संध्या को 4:00 से 6:00 बजे तक पूजन-अभिषेक करने के लिये गर्भ गृह में प्रवेश दिया जायेगा। इसी प्रकार 21 फरवरी को महा शिवरात्रि पर प्रात: 8:15 से 10:15 बजे तक दोपहर 2:00 से 3:15 बजे तक गर्भ गृह में प्रवेश मिलेगा।



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