शनिवार, 1 फ़रवरी 2020

कात्यायनी देवी मन्दिर, वृन्दावन

भगवान कृष्ण की क्रीड़ा स्थली वृन्दावन में जहां भगवान राधा-कृष्ण के मन्दिर और उनके लीला स्थान हैं वहीं 5000 मन्दिरों की इस नगरी वृन्दावन के राधाबाग में कात्यायनी पीठ देवी मन्दिर स्थापित है। कात्यायनी पीठ मन्दिर में देवी के दर्शन करने के लिए देश- विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

वृन्दावन के कात्यायनी देवी मन्दिर में विराजित कात्यायनी देवी 


सन्त श्यामाचरण लाहिड़ी महाराज के शिष्य स्वामी केशवानन्द ब्रह्मचारी महाराज ने कामरुप मठ के स्वामी रामानन्द तीर्थ महाराज से दीक्षा लेकर हिमालय की कन्दराओं में साधना करने के बाद 1 फरवरी 1923 में माघ पूर्णिमा के दिन मन्दिर की प्रतिष्ठा का कार्य पूर्ण कराया। बनारस और बंगाल सहित देश के कोने-कोने से प्रतिष्ठित वैदिक ब्राह्मणों ने वैष्णव परम्परा से मन्दिर की प्रतिष्ठा का कार्य किया। कात्यायनी देवी के साथ मन्दिर में पंचानन शिव, विष्णु, सूर्य और भगवान गणेश की मूर्तियाँ स्थापित की गयी। कात्यायनी मन्दिर परिसर में ही गुरु मन्दिर, शन्कराचार्य मन्दिर, शिव मन्दिर और सरस्वती मन्दिर दर्शनीय हैं। शन्कराचार्य मन्दिर में वेद विद्यालय सन्चालित है, जिसमें आचार्यों द्वारा ब्राह्मण समाज के बच्चों को संस्कृत भाषा और वैदिक शिक्षा दी जाती है। इसके अलावा कात्यायनी मन्दिर में विशाल यज्ञशाला स्थापित है। यज्ञशाला में नवरात्रि एवं विशेष अवसरों पर पण्डितों द्वारा यज्ञ किये जाते हैं।

वृन्दावन स्थित कात्यायनी देवी मन्दिर 


मन्दिर के स्वामी विद्यानन्द महाराज ने बताया कि कात्यायनी मन्दिर की स्थापना के पीछे मान्यता है कि वृन्दावन में जिस स्थान पर मन्दिर स्थापित है वहाँ देवी सती के केश यानि बाल गिरे थे। इसका प्रमाण आर्य शास्त्र, ब्रह्मवैवर्त पुराण और आद्या स्तोत्र में मिलता है।

                          स्वामी विद्यानन्द महाराज मन्दिर के बारे में जानकारी देते हुये 

भक्तों में मान्यता है कि बृज की गोपियों ने भगवान कृष्ण को पति के रुप में पाने के लिए माघशीर्ष में यमुना स्नान कर व्रत और कात्यायनी देवी की पूजा की थी। इस सम्बन्ध में देवर्षि वेद व्यास द्वारा श्रीमद भागवत के दशम स्कन्ध के 22वें अध्याय में लिखा है कि

कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरी।
नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नम: 

यह मान्यता आज भी प्रचलित है। युवतियाँ अच्छा वर पाने के लिये कात्यायनी देवी का दर्शन और पूजन करती हैं।

संगमरमर से बने प्रतिष्ठित कात्यायनी मन्दिर में चैत्र माह और आश्विन माह की नवरात्रि के दौरान विभिन्न धार्मिक आयोजन होते हैं। मन्दिर में नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि के मिलन पर विशेष सन्धि आरती की जाती है। मन्दिर में होने वाली इस विशेष आरती में शामिल होने के लिए देश के कोने-कोने से भक्तजन आते हैं।


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