सोमवार, 10 फ़रवरी 2020

राधागोपीनाथ मन्दिर में मना ठाकुरजी का प्राकट्य महोत्सव

वृन्दावन के प्राचीन सप्त देवालय में से एक राधागोपीनाथ मन्दिर में ठाकुरजी का प्राकट्य महोत्सव माघ शुक्ल पक्ष पूर्णिमा के दिन विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के मध्य मनाया गया। ठाकुर राधागोपीनाथ के महाअभिषेक के दर्शनों के लिये बड़ी संख्या में भक्तजन मन्दिर पहुँचे।

ठाकुर राधागोपीनाथ मन्दिर में प्राकट्योत्सव के अवसर पर मन्दिर के गर्भ गृह में विराजित ठाकुर राधागोपीनाथ के विग्रह का सेवायत राजा गोस्वामी ने 108 किलो दूध, दहि, घृत, शहद और शक्खर से बने पञ्चामृत से महाभिषेक किया। इसके पश्चात् 108 कलशों से ठाकुरजी का जलाभिषेक किया गया। अभिषेक के दौरान सन्तजन द्वारा शंख, मृदंग, झांझ, मंजीरों की सुमधुर ध्वनि के मध्य संकीर्तन किया गया भक्ति रस में डूबे भक्तजन अपने आराध्य राधागोपीनाथ के जयकारे लगा रहे थे।

वृन्दावन के प्राचीन राधागोपीनाथ मन्दिर में आयोजित प्राकट्य महोत्सव में ठाकुरजी का अभिषेक करते गोस्वामीजन।


मन्दिर की परम्परा अनुसार महाअभिषेक होते ही मन्दिर के पट बन्द कर दिये गये कुछ समय बाद ठाकुरजी ने भक्तों को शृङ्गार दर्शन दिये और मन्दिर के गोस्वामी ने ठाकुरजी की शृङ्गार आरती की। तत्पश्चात् सभी भक्तजनों ने एक-दूसरे को अपने आराध्य ठाकुर राधागोपीनाथ के प्राकट्योत्सव की बधाई दी व सम्पूर्ण मन्दिर जयकारों से गुंजायमान हो गया। गोस्वामियों द्वारा उपस्थित भक्तों को पँचामृत वितरित किया गया।

                         प्राकट्य महोत्सव में ठाकुरजी का अभिषेक करते गोस्वामीजन।

प्राकट्योत्सव में पधारें सन्तों और समाजियों ने परम्परागत शैली में रसिक सन्तों के पदों का गायन किया। इसके पश्चात् ठाकुरजी को पकवानों का भोग सेवित किया गया और गर्भगृह के पट बन्द हो गये तथा मन्दिर के विशाल चौक में सन्त और भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया। शाम को ठाकुरजी के प्राकट्यकर्ता मधु पण्डित की समाधि का मन्दिर के गोस्वामीजनों ने विधिविधान से पूजन किया।


            राधागोपीनाथ मन्दिर में प्राकट्य महोत्सव की जानकारी देते सेवायत राजा गोस्वामी।    

मन्दिर के सेवायत राजा गोस्वामी ने बताया की वर्ष 1527 में ठाकुरजी राधागोपीनाथ को मधु पण्डित जी ने प्राकट्य किया था। शास्त्रों के अनुसार जहां मन्दिर स्थित है, वह वंशीवट  टीला है। ठाकुर राधागोपीनाथजी वंशीवट टीला पर विराजते हैं। 

1 टिप्पणी:

  1. श्री राधा गोपीनाथ। भगवान के बहुत बहुत-बहुत बधाई। प्राकट्य। उत्सव। की

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