गुरुवार, 13 फ़रवरी 2020

समाज गायन - बृज की विशिष्ट गायन शैली

वृन्दावन के मन्दिरों में होली के पदों का गायन कर ठाकुरजी को रिझाते हैं समाजी


वृन्दावन के मन्दिर और प्राचीन देवालयों में अपने आराध्य को रिझाने के लिये मन्दिर के गोस्वामीजन, समाजी और भक्तजन परम्परागत शैली में समाज गायन करते। रसिक सन्तों द्वारा रचे गये इन पदों का गायन ढप, मृदंग, ढोलक, झाँझ और मंजीरा की सुमधुर ध्वनि के साथ किया जाता है। प्रत्येक पद को भारतीय शास्त्रीय संगीत पर आधारित एक विशिष्ट राग पर लयबद्ध किया गया है। समाज गायन की इस शैली में ठाकुर की होने वाली प्रत्येक सेवा व उत्सव के लिये विशिष्ट पद लिखे गये हैं पदों के गायन को सुन देश से ही नहीं वरन विदेशों से आये भक्तजन भी भावविभोर हो जाते है।

फाल्गुन माह में सम्पूर्ण बृज मण्डल में होली की धूम रहती है। अतः वृन्दावन के ठाकुर राधावल्लभ मन्दिर, श्रीजी का मन्दिर, बड़ा रास मण्डल, सेवाकुञ्ज, निम्बार्क कोट, यशोदा नन्दन मन्दिर, भट्टजी की हवेली में फाल्गुन माह शुरू होने के साथ ही होली के पद, धमार और भगवान राधाकृष्ण की लीलाओं का गायन हवेली शास्त्रीय संगीत शैली में किया जा रहा है। संध्या के समय इन मन्दिरों में ठाकुरजी के समक्ष समाज गायन को सुन भक्तजन भी भक्तिरस का आनन्द ले रहे हैं। विदेशी भक्तजन मन्दिरों की इस गायन शैली को अपने कैमरों में संचित कर रहे हैं। ठाकुर राधावल्लभ मन्दिर में समाजी राकेश मुखिया के निर्देशन में समाज गायन किया जा रहा है। समाजियों ने सन्त माधुरीदास रचित राग धनाश्री में होरी की धमार का गायन किया।

... हो हो होरी बोलहीं नवल कुँवर मिलि खेलहिं फाग।
आगम सुन ऋतुराज कौ प्रगट्यौ मन कौ अति अनुराग
बरस दिवस लागी रहै या सुख की आशा जिय माहिं जो
क्योंहूँ बिधना रचै सबै द्यौस होरी ह्वै जाहिं॥ अति

                                        ठाकुर राधावल्लभ मन्दिर में समाज गायन करते समाजी 

राधावल्लभ मन्दिर के आचार्य मोहित मराल गोस्वामी ने बताया बृज के मन्दिरों में ठाकुरजी की नित्य सेवा के अन्तर्गत राग सेवा का विशेष महत्व है। राग सेवा में माह, समय और ठाकुरजी के गर्भ गृह में सेवाधिकारी द्वारा ठाकुरजी की हो रही सेवा के अनुरूप ही पदों का गायन समाजियों द्वारा किया जाता है। भोग के समय में भोग के पद, शयन के समय शयन के पद, मंगला दर्शन के समय मंगला के पद उसी तरह होरी के समय होरी के पदों का गायन किया जाता है। वर्त्तमान में फाल्गुन माह में संध्या के समय मन्दिरों में होली के पद, धमार और उनकी निकुञ्ज लीलाओं पर आधारित पदों का गायन किया जा रहा है।



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