सोमवार, 17 फ़रवरी 2020

कृष्ण भक्त ताज बीवी की समाधि पर मना रसोत्सव, जमकर झूमे भक्त


भगवान कृष्ण की भक्त ताज बीवी की समाधि भले ही वीरान जंगल के बीच देखरेख के अभाव में खण्डहर में बदल गयी हो लेकिन भगवान कृष्ण के भक्त और रसिकजनों के मानस पटल पर वह हमेशा बसीं हुयी हैं। जब भगवान कृष्ण के अनन्य भक्तों की बात चले तो ताज बीवी को भुलाया नहीं जा सकता। ताज बीवी द्वारा कृष्ण भक्ति पर आधारित रचित कवित्त, छन्द, धमार आज भी पुष्टिमार्गीय मन्दिरों में गाये जाते हैं। ऐसी कृष्ण भक्त ताज बीवी को महावन रमणरेती के समीप उनकी समाधि पर याद किया गया और रसोत्सव मनाया गया। रसोत्सव में भजन गायक जे.एस.आर.मधुकर ने भजन प्रस्तुत किये।


रसोत्सव में झूमते भक्त 


बृज के रसिक भक्तजनों की स्मृति में आयोजित रसोत्सव की शृंखला में कृष्ण भक्त ताज बीवी की समाधि पर भजन गायक जे.एस.आर.मधुकर ने भजनमाला प्रस्तुत की, जिसमें ...राधे तेरौ रसिया सितम करै...,मन लागो लागो मन लागो लागो मेरे यार..., खेलो पिया सँग...,कहत कबीर सुनो भाई साधो... भजनों को सुन भक्तजन भावविभोर होकर जमकर झूमे। वहीं सन्त मदनबिहारी दास महाराज सहित अन्य सन्तजनों ने विचार प्रस्तुत किये। उत्सव के समापन पर भण्डारे का आयोजन किया गया। जिसमें भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। 


                                             रसोत्सव में भजन प्रस्तुत करते भजन गायक 
बृज संस्कृति संगीत समिति द्वारा आयोजित रसोत्सव के माध्यम से यह प्रयास किया जा रहा है कि बृज में अनेक सन्तों और भक्तजनों की समाधियाँ, बैठकें और उनकी भजन स्थलियाँ हैं जो धीरे-धीरे विलुप्त हो रहीं हैं और जिनकी वजह से ही यह बृज धाम है, उनका प्रकाशोत्सव हो और उनकी रचनाओं का गायन किया जाय।

अकबर की मुंह बोली बेटी ताज बीवी जो हो गयी कृष्ण की दीवानी

जे.एस.आर.मधुकर ने बताया की ताज बीवी अकबर की मुँहबोली बेटी थी। अकबर की पत्नी जोधाबाई ने ताज बीवी को गोद लिया था। 16 वर्ष की अवस्था में ही ताज बीवी बृज आ गयी थी और फिर कभी वापस नहीं गयी। बृज में ताज बीवी बल्लभ सम्प्रदाय के विट्ठलनाथ गोस्वामीजी की शिष्या बनीं और बृजवास कर कृष्ण की भक्ति में रच बस गयी। ताज बीवी मुसलमान होकर भी भगवान कृष्ण की ऐसी दीवानी हो गयीं कि स्वयं भगवान कृष्ण को इन्हें दर्शन देने के लिए आना पड़ा। महावन रमणरेती के समीप ताज बीवी की समाधि आज भी कृष्ण भक्ति की गाथा कह रही है।

                                     रसोत्सव के बारे में जानकारी देते जे.एस.आर.मधुकर 
बृज में ताजबीवी का एक प्रसङ्ग

ताज बीवी के बारे में एक प्रसङ्ग है कि एक बार इन्होंने मौलवियों और अपने इमाम से पूछा कि क्या अल्लाह का दीदार हो सकता है। सभी ने उत्तर दिया हाँ हो सकता है। इन सभी का उत्तर जानकर ताज बीवी काबाशरीफ की यात्रा पर चल पड़ीं। मार्ग में एक पड़ाव बृज के गोकुल क्षेत्र में पड़ा। घण्टे घड़ियालों की आवाज सुनकर ताज बीवी ने लोगों से पूछा कि यह कैसी आवाज है।

तब ताज बीवी के दीवान ने उन्हें बताया कि कहा यहाँ कुछ लोगों का छोटा खुदा रहता है। ताज बीवी ने आग्रह किया कि वह छोटा खुदा से मिलकर ही आगे चलेंगी। लेकिन जैसे ही ताज बीवी ने मन्दिर में प्रवेश करना चाहातीर्थ पुरोहितों ने उन्हें रोक दिया। तब ताज बीवी वहीं बैठकर गाने लगीं। कहते हैं ताज बीवी की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान श्री कृष्ण ने इन्हें साक्षात दर्शन देकर कृतार्थ किया। तभी यहाँ ताज बीवी गोस्वामी विट्ठलनाथ जी की शिष्या बन गयीं और हमेशा के लिये बृज कि होकर रह गयींl

आगे होने वाले रसोत्सव

रसोत्सव की शृंखला में अगला आयोजन महावन रमणरेती के समीप बल्लभ सम्प्रदाय के बिट्ठलनाथ गोस्वामीजी महाराज के शिष्य रसखानजी की समाधि पर किया जायेगा। इसके पश्चात् वृन्दावन में राधावल्लभ सम्प्रदाय के सन्त नेह नागरीदास और मदनमोहन सूरदासजी का उत्सव मनाया जायेगा।




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