बुधवार, 19 फ़रवरी 2020

वृन्दावन के प्राचीन सप्त देवालयों में से एक राधारमण मन्दिर

तीर्थनगरी वृन्दावन के प्राचीन सप्त देवालयों में से एक राधारमण मन्दिर देशी विदेशी भक्तों की आस्था का केन्द्र है। लगभग 478 साल पुराने इस मन्दिर में जन जन के आराध्य राधारमण जी की पूजा और भोग, राग सेवा ठाकुर जी के प्राकट्यकर्ता गोपाल भट्ट गोस्वामी के शिष्य दामोदर गोस्वामी के वंशज गोस्वामी परिवार द्वारा की जा रही है। 

राधारमण मन्दिर 

प्रभु राधारमण का प्राकट्य चैतन्य महाप्रभु के शिष्य गोपाल भट्ट गोस्वामी ने अपनी  प्रेमभक्ति के द्वारा शालिग्राम से सन 1542 में वैशाख शुक्ल पूर्णिमा तिथि को किया । निधीवन के निकट गोपाल भट्ट गोस्वामीजी के सानिध्य में एक भक्त ने कक्ष का निर्माण कराया। जिसमें भगवान को विराजित कर पूजा सेवा की गयी। इसके पश्चात मन्दिर के गोस्वामी परिकर के शिष्य लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह के मन्त्री दोनों सगे भाई शाह कुन्दल लाल और शाह फुन्दन लाल ने मन्दिर का नव र्निमाण वर्तमान से करीब 200 वर्ष पूर्व कराया, जिसमें आज भी ठाकुर राधारमण जी विराजमान है। जिस भवन में पहले ठाकुरजी विराजित थे, उसे ठाकुरजी की रसोई और भोजन कक्ष का रुप दे दिया गया। 

 ठाकुर राधारमण जी का प्राकट्य स्थल 

प्राचीन राधारमण मन्दिर परिसर में प्रभु राधारमण जी का प्राकट्य स्थल जिसे गोस्वामीजन और स्थानीय भक्तजन डोल मण्डल भी कहते हैं क्योंकि वह लाल पत्थर से गोलाकार में बना हुआ है। इसके अलावा भगवान राधारमण जी के प्राकट्यकर्ता गोपाल भट्ट गोस्वामीजी की समाधि, श्री गोपीनाथ दास गोस्वामी की भजन स्थली, रासमण्डल चबूतरा स्थित है। मन्दिर में उत्सव के समय इन सभी स्थलों पर अभिषेक और पूजन गोस्वामीजनों द्वारा किया जाता है।  


मुगल शासनकाल में ठाकुर राधारमण गए थे फरुक्खाबाद 


मन्दिर के पदमलोचन गोस्वामी ने बताया कि मुगल शासक औरंगजेब के आक्रमण के समय सन1674 में बृज के कई मन्दिरों के ठाकुरजी सुरक्षा की दृष्टि से राजाओं के यहाँ राजस्थान चले गये। लेकिन ठाकुर राधारमण जी ने राजाश्रय सेवा स्वीकार नहीं की। ठाकुर राधारमणजी को मन्दिर के गोस्वामी के शिष्य के यहाँ फरुक्खाबाद ले जाया गया। मुगल शासन काल  में ठाकुरजी गोपनीय रूप से भक्तों के यहाँ सेवा लेते रहे। मुगल शासन समाप्त होने के बाद ठाकुर राधारमण लाल पुन: वृन्दावन अपने निज मन्दिर में आ गये। 

भगवान राधारमण के दर्शन से 3 ठाकुरों का होता है दर्शन लाभ 


कहा जाता है कि भगवान कृष्ण के प्रपौत्र बज्रनाभ की माँ ऊषा का यह कथन कि भगवान गोविन्ददेव का मुख,भगवान गोपीनाथ का वक्ष और भगवान मदनमोहन जी के श्री चरण भगवान कृष्ण से मिलते जुलते हैं। चैतन्य महाप्रभु के शिष्य गोपाल भट्ट गोस्वामी जी ने इन तीन बातों को अपने ठाकुर राधारमण में दर्शन करने की तीव्र इच्छा थी। अपने अनन्य भक्त की मनोकामना को पूरा करते हुये शालिग्राम से ठाकुर राधारमण प्रकट हुये। इसलिए कहा जाता है कि ठाकुर राधारमण जी के दर्शन करने से 3 ठाकुरों का दर्शन लाभ मिलता है। 

मन्दिर के पट खुलने का समय 


गर्मियों में -
प्रात: 5:30 से मध्यान 12 बजे तक 
सन्ध्या 6:00 से 9:00 बजे तक 

सर्दियों में - 
प्रात: 6:30 से मध्यान 1:00 बजे तक 
सन्ध्या 5:00 से 8:00 बजे तक 
  

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