बुधवार, 19 फ़रवरी 2020

भगवान ओंकारेश्वर महादेव सोमवार को पालकी में करते हैं भ्रमण

देश के द्वादश ज्योतिर्लिंग में से एक भगवान ओंकारेश्वर महादेव मन्दिर मध्यप्रदेश के इन्दौर शहर से लगभग 77 किमी की दूरी पर स्थित है। मन्दिर में विराजित ओंकारेश्वर महादेव प्रत्येक सोमवार को पुष्पों से सजी-धजी पालकी में विराजमान होकर नर्मदा नदी के तट पर और नगर में भ्रमड़ करते हैं। श्रावण माह में मन्दिर की इस प्राचीन परम्परा को महोत्सव के रूप में मनाया जाता है। 

भगवान ओंकारेश्वर महादेव 

सुप्रसिद्ध भगवान ओंकारेश्वर महादेव मन्दिर की प्राचीन धर्म परम्परा के अनुसार प्रत्येक सोमवार को मन्दिर में विराजित भगवान ओंकारेश्वर महादेव का तीन मुखों वाला स्वर्णजड़ित चल विग्रह पुष्पों से सजी-धजी पालकी में मन्दिर के पुजारियों द्वारा विराजित किया जाता है। मन्दिर से भगवान की पालकी ढ़ोल नगाड़ों के साथ पुजारियों और भक्तों द्वारा शोभायात्रा के रूप में निकाली जाती है। स्थानीय भक्तजन भगवान ओंकारेश्वर महादेव के इस विशेष दर्शन को डोला दर्शन, पालकी दर्शन और सोमवार सवारी के नाम से भी जानते हैं। भगवान की सवारी को लेकर मन्दिर के पुजारी सर्वप्रथम नर्मदा नदी के तट पर जाते हैं। नदी के तट पर पुजारियों द्वारा पालकी में विराजित भगवान ओंकारेश्वर महादेव की पूजा अर्चना की जाती है । इसके पश्चात भगवान ओंकारेश्वर महादेव की यह सवारी नगर के विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण करते हुये पुनः ओंकारेश्वर महादेव मन्दिर पहुँचती है।  इसी के साथ ही भगवान ओंकारेश्वर महादेव की पालकी सवारी सम्पन्न होती है।

भगवान ओंकारेश्वर महादेव का चल विग्रह

श्रावण माह में पालकी सवारी की परम्परा को बड़े पैमाने पर महोत्सव के रूप में मनाया जाता है। सवारी में भक्तजन भोलेनाथ के उदघोषों के साथ गुलाल उड़ाते और नृत्य करते हुये चलते हैं। भगवान ओंकारेश्वर महादेव की पालकी सवारी में स्थानीय भक्तों के साथ देशभर से आकार श्रद्धालु शामिल होते हैं। 

ऐसे पड़ा भगवान शिव का नाम ओंकारेश्वर महादेव 


ओमकार का उच्चारण सर्व प्रथम सृष्टि करता भगवान ब्रह्मा के मुख से हुआ था। वेद पाठ का प्रारम्भ भी ॐ के बिना नहीं होता है। वही ओमकार स्वरूप ज्योतिर्लिंग भगवान ओंकारेश्वर हैं। मध्यप्रदेश के खण्डवा के पावन स्थल पर भगवान शिव ओमकार रूप में प्रकट हुये, इसलिये भगवान शिव का नाम ओंकारेश्वर हो गया। 
 स्कन्द पुराण, शिव पुराण और वायु पुराण में भगवान ओंकारेश्वर की महिमा का उल्लेख है। ओंकारेश्वर में 68 तीर्थ हैं। यहाँ 33 कोटी देवता विराजमान हैं। मान्यता है कि भगवान ओंकारेश्वर महादेव प्रतिदिन तीनों लोकों में भ्रमण करने के पश्चात संध्या समय में नर्मदा नदी के तट पर स्थित ओंकारेश्वर मन्दिर में आकर विश्राम करते हैं। इसीलिए ओंकारेश्वर महादेव मन्दिर में प्रतिदिन भगवान शिव की विशेष शयन सेवा और शयन आरती की जाती है। भगवान ओंकारेश्वर महादेव के शयन दर्शन का विशेष महत्व है। 

भगवान ओंकारेश्वर का पूजन 3 पुजारी वर्ग द्वारा होता है 


भगवान ओंकारेश्वर मन्दिर में प्रतिदिन 3 पूजा की जाती हैं। प्रात:कालीन पूजा मन्दिर ट्रस्ट द्वारा, दोपहर किम पूजा सिंधिया घराने के पुजारी द्वारा और संध्याकालीन पूजा होलकर स्टेट के पुजारी द्वारा की जाती है। 

ओंकारेश्वर मन्दिर में भगवान के दर्शन का समय


प्रात:कालीन सेवा 
प्रात: 5 बजे - मंगला आरती नैवेध्य भोग
प्रात: 5:30 बजे - दर्शन प्रारम्भ 

मध्यान कालीन सेवा 
दोपहर 12:20 से 1:10 बजे तक - मध्यान्ह भोग
दोपहर 1:15 बजे से पुनः दर्शन प्रारम्भ 

संध्याकालीन सेवा 
संध्या 4:00 बजे से दर्शन प्रारम्भ 
 शाम 4 बजे के पश्चात बिल्वपत्र, फूल, नारियल आदि पूजन सामग्री गर्भ गृह में ले जाना प्रतिबन्धित है। 

शयन आरती 
रात्रि 8:30 से 9:00 बजे तक शयन आरती 
रात्रि 9 से 9:35 बजे तक शयन दर्शन 

फोटो साभार -ओंकारेश्वर महादेव मन्दिर  

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