रविवार, 2 फ़रवरी 2020

बरसाना स्थित गुलाब सखी की समाधि पर मनाया रसोत्सव

भक्ति संगीत पर झूमे देशी-विदेशी भक्त


बरसाना स्थित गुलाब सखी की समाधि पर रसोत्सव का आयोजन किया गया। सन्त, महन्त के सानिध्य में भजन गायक जे.एस.आर. मधुकर ने राधाकृष्ण की लीलाओं पर आधारित भजन प्रस्तुत किये। भजनों पर स्थानिय भक्तों के साथ विदेशी भक्त भी जमकर झूमे। हमारे माहि श्री बरसानों गांव..., जब से नैन प्रिया सँग लागे...,गोविन्दा हरि गोविन्दा हरि आदि भजन प्रस्तुत किये गये। भजन गायक जे.एस.आर. मधुकर ने बताया कि बृज के रसिक सन्तों और प्रभु के अनन्य भक्तों की बृज में जितनी भी समाधि और स्थल हैं, उन स्थलों और समाधिओं पर रसोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन पिछले 1 वर्ष से निरन्तर आयोजित किया जा रहा है। आज बरसाने में श्री जी की सहचरी गुलाब सखी की समाधि पर उनकी स्मृति में रसोत्सव का आयोजन किया गया। जिसमें गुलाब सखी द्वारा रचित पदों के गायन के साथ ही भगवान राधा-कृष्ण की लीलाओं का भजनों के माध्यम से वर्णन किया गया।


भजन गायक मधुकर रसोत्सव में भजन प्रस्तुत करते हुये

                                     रसोत्सव में उपस्थित श्रोतागण व सन्त-महन्त 
       
भजन गायक मधुकर ने बताया कि रसोत्सव के अन्तर्गत अगला कार्यक्रम अकबर की मुंह बोली बेटी ताज बीबी की स्मृति में 16 फरवरी को गोकुल स्थित समाधि पर किया जायेगा। ताज बीबी ने गोकुल वास करके राधा-कृष्ण की भक्ति की थी।

                          मधुकर रसोत्सव व गुलाब सखी के बारे में जानकारी देते हुये 
                                     

कौन थे गुलाब सखी



बरसाना स्थित गुलाब सखी की समाधी 


गुलाब नाम के एक सेवक श्री जी के महल में करीब 100 साल पहले सेवा किया करते थे। उनकी एक बेटी थी जिसका नाम राधा था। बेटी राधा को सेवक गुलाब बहुत स्नेह करते थे। गुलाब बहुत निर्धन थे। बेटी राधा का विवाह बरसाने के गोस्वामियों ने मिलकर आर्थिक मदद देकर कराया था। बेटी के विरह के कारण सेवक गुलाब ने कई दिनों तक भोजन नहीं किया और वह श्री जी के महल की सीढ़ियों पर आकर बैठ गये और भजन गाने लगे। उन्हें राधारानी ने दर्शन दिये। राधारानी के सेवक होने के साथ उनके भजनों को सुन लोग उन्हें गुलाब सखी कहने लगे। गुलाब सखी की समाधि बरसाना स्थित पीली पोखर के निकट स्थित है।

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