शनिवार, 29 फ़रवरी 2020

वृन्दावन के प्राचीन सप्त देवालयों में से एक राधाश्यामसुन्दर मन्दिर


तीर्थनगरी वृन्दावन के प्राचीन सप्त देवालयों में से एक राधाश्यामसुन्दर मन्दिर में विराजित भगवान श्यामसुन्दर आज से 442 वर्ष पहले प्रकट हुये थे। भगवान राधाकृष्ण की साधना के फलस्वरूप श्री श्यामानन्द प्रभुजी को 23 जनवरी 1578 में वसन्त पंचमी तिथि को भगवान श्यामसुन्दर प्राप्त हुये। श्री श्यामानन्द प्रभुजी ने मन्दिर निर्माण से पहले भगवान श्यामसुन्दर को वृन्दावन के सेवाकुंज मोहल्ला में बनी अपनी भजन कुटीर में विराजमान किया। इसके पश्चात लगभग सन 1580 में भरतपुर के राजा को अपने रत्न भण्डार में स्वयं प्रकटित राधारानी का श्रीविग्रह मिला, जिसे राजा ने वृन्दावन लाकर श्यामसुन्दर मन्दिर में भगवान श्यामसुन्दर के साथ विराजमान कर दिया। 

श्री राधाश्यामसुन्दर

बृजवासी और सन्तजन उस समय भगवान श्यामसुन्दर को लाला और राधारानी को लाली प्रेम भाव में कहा करते थे, इसलिये मन्दिर निर्माण के शुरुआत में राधाश्यामसुन्दर मन्दिर को लाला-लाली का मन्दिर कहा जाने लगा। भरतपुर के राजा ने वसन्त पंचमी तिथि को 31 जनवरी 1580 में भगवान श्यामसुन्दर से राधारानी का विवाह महोत्सव धूमधाम के साथ कराया। श्री श्यामानन्द प्रभुजी निरन्तर आराध्य श्री राधाश्यामसुन्दर की प्रेम सेवा किया करते थे। प्रभुजी ने सांसारिक जगत छोड़ने से पहले अपने आराध्य श्री राधाश्यामसुन्दर की सेवा का दायित्व अपने प्रिय शिष्य रसिकानन्द देव गोस्वामी को सौंप दिया। तब से लेकर अभी तक रसिकानन्द प्रभु के वंशज गोस्वामी प्रभुपादगण ही वंश परम्परा से भगवान राधाश्यामसुन्दर की प्रेम सेवा निष्ठाभाव के साथ करते चले आ रहे हैं। प्राचीन राधाश्यामसुन्दर मन्दिर में विराजित श्रीविग्रह आकार में छोटे होने के कारण तत्कालीन गोस्वामी की अनुमति से सन्त श्री बल्देव विद्याभूषणपाद ने उड़ीसा के नीलगिरि शिलाखण्ड से भगवान श्यामसुन्दर और राधारानी का बड़ा श्रीविग्रह तैयार कराकर लगभग सन 1719 में बसन्त पंचमी तिथि को मन्दिर के गर्भगृह में विराजमान करा दिया। राधाश्यामसुन्दर मन्दिर में भगवान के बड़े श्रीविग्रह के वायीं ओर प्राचीन छोटे श्रीविग्रह वर्तमान में भी विराजमान हैं।



श्री राधाश्यामसुन्दर मन्दिर

राधाश्यामसुन्दर मन्दिर में वर्ष में होने वाले प्रमुख उत्सव

वसंत पंचमी महोत्सव

वृन्दावन के प्राचीन राधाश्यामसुन्दर मन्दिर के श्री कृष्णगोपालानन्ददेव गोस्वामी प्रभुपाद ने बताया कि मन्दिर में वसन्त पंचमी तिथि का विशेष महत्व है, क्योंकि वसन्त पंचमी को ठाकुरजी का प्राकट्य होने के साथ ही इसी तिथि को मन्दिर में भगवान श्री श्यामसुन्दर का राधारानी के साथ विवाह हुआ और इसी दिन मन्दिर में भगवान के बड़े श्रीविग्रह भी स्थापित हुये। इसलिए राधाश्यामसुन्दर मन्दिर में वसन्त पंचमी को महोत्सव के रूप में मनाया जाता है। महोत्सव में अखण्ड हरिनाम संकीर्तन, नगर संकीर्तन शोभायात्रा, भण्डारा, छप्पन भोग, रासलीला का मंचन किया जाता है। इसी दिन भगवान राधाश्यामसुन्दर बंगाली वर-वधु के रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।

होली महोत्सव

फाल्गुन शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को ठाकुर श्यामसुन्दर हाथ में पिचकारी, ढाल लेकर और राधारानी पिचकारी, लाठी लेकर भक्तों को दर्शन देते हैं। मन्दिर के चौक में शाम 4 बजे से बृजवासीगण होली के रसिया और भजनों का गायन करते हैं।

श्री श्यामानन्द प्रभुजी का आविर्भाव महोत्सव

ठाकुर श्री राधाश्यामसुन्दर की प्रथम प्रेम सेवा करने वाले श्री श्यामानन्द प्रभुजी का आविर्भाव महोत्सव मन्दिर में चैत्र पुर्णिमा को मनाया जाता है। मन्दिर में महोत्सव के अन्तर्गत अखण्ड हरिनाम संकीर्तन, आविर्भाव लीला, साधू और वैष्णव सेवा की जाती है।

चन्दन यात्रा महोत्सव

अक्षय तृतीया तिथि को भगवान राधाश्यामसुन्दर संध्या के समय 6 से रात्रि 10 बजे तक सर्वांग चन्दन शृङ्गार दर्शन भक्तों को देते हैं। मन्दिर में फूलबंगला, भजन संध्या का आयोजन किया जाता है।

झूलन यात्रा महोत्सव

श्री राधाश्यामसुन्दर मन्दिर में श्रावण शुक्ल तृतीया से पूर्णिमा तिथि तक ठाकुर राधाश्यामसुन्दर का झूलन महोत्सव मनाया जायेगा। संध्या 6 से रात्री 9 बजे तक प्रतिदिन ठाकुरजी पुष्पों से सजे 3 झूलों में विराजमान होकर झूलते हैं। आयोजन के दौरान दिन और तिथि के अनुसार ठाकुरजी को पोशाक धारण करायी जाती है।  

श्री राधाश्यामसुन्दर मन्दिर की नित्य आरती का समय 

मंगला आरती – प्रात: 4 बजे

धूप आरती   – प्रात: 8:15 बजे

शृङ्गार आरती – प्रात: 10:30 बजे

राजभोग आरती प्रात: 11:30 बजे

धूप,ग्वाल आरती संध्या 4:15

संध्या आरती - संध्या 6:00 बजे

भोग आरती – रात्री 8:00 बजे

शयन आरती – रात्रि 9:00 बजे

दर्शनों का समय 

प्रात: 4:00 से 4:15 बजे तक

प्रात: 7:00 से 10:30 बजे तक

प्रात: 11:30 से 11:45 बजे तक

संध्या 4:15 से रात्रि 8:00 बजे तक

रात्रि  9:00 से 9:05 बजे तक

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