गुरुवार, 13 फ़रवरी 2020

फाल्गुन माह की पूर्णिमा को हुयी चन्द्रमा की उत्पत्ति


उत्तर भारतीय हिन्दु पञ्चाङ्ग का अन्तिम माह फाल्गुन होता है। इस माह को फागुन माह भी कहा जाता है। फाल्गुन माह के बाद हिन्दु नववर्ष का प्रारम्भ हो जाता है। इस वर्ष फाल्गुन माह 10 फरवरी, सोमवार से प्रारम्भ होकर 9 मार्च तक होगा। शास्त्रों में मान्यता है कि फाल्गुन माह की पूर्णिमा को महर्षि अत्रि और देवी अनुसूया से चन्द्रमा की उत्पत्ति हुयी थी। इसलिए इस माह की पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा की आराधना की जाती है।

फाल्गुन माह के प्रारम्भ में शिशिर ऋतु व मध्य और अन्त में वसन्त ऋतु होने से मौसम हल्की ठण्डक लिये होता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार फाल्गुन माह फरवरी-मार्च के मध्य आता है। फाल्गुन मास में भगवान शिव का प्रिय त्यौहार महाशिवरात्रि आता है। इसके साथ ही रँगों का त्यौहार होली भी इसी माह में मनाया जाता है। महाशिवरात्रि पर जहां शिव पूजा का विशेष महत्व  है वहीं होली पर देशभर में लोग रँगों से सराबोर रहते हैं।

श्री राधा-कृष्णा होली खेलते हुये 

फाल्गुन माह में आने वाले उत्सव –


फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को फाल्गुन पूर्णिमावसन्त पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है और इस ही दिन हिन्दुओं का प्रमुख त्यौहार होली मनाया जाता है

फाल्गुन पूर्णिमा के दिन ही लक्ष्मी जयन्ती भी मनायी जाती है

बंगाल में फाल्गुन पूर्णिमा को दोल पूर्णिमा के नाम से जाना है

फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को महा शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है

फाल्गुन माह की द्वादशी तिथि का भी विशेष महत्व है। फाल्गुन माह की द्वादशी के दिन यदि श्रवण नक्षत्र पड़ रहा हो तो उस दिन का महत्त्व अनेक गुना बढ़ जाता है। मान्यतानुसार इस दिन भगवान विष्णु की आराधना व उपवास करने से कई यज्ञों के बराबर फल की प्राप्ति होती है।

फाल्गुन माह की पुर्णिमा को दक्षिण भारत में उत्तिर नाम का मन्दिरोत्सव मनाया जाता है।

फाल्गुन माह की अष्टमी को देवी लक्ष्मी और सीता की विशेष पूजा करने की परम्परा है।

गौड़ीय वैष्णव फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गौर पूर्णिमा के रूप में मनाते हैं, इस दिन गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय के संस्थापक चैतन्य महाप्रभु का जन्म हुआ था

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