बुधवार, 5 फ़रवरी 2020

प्रेम मन्दिर, वृन्दावन


कृपालुजी महाराज ने 11 वर्षों में 150 करोड़ की लागत से करवाया था मन्दिर का निर्माण


मन्दिरों की नगरी वृन्दावन के प्रवेश मार्ग पर स्थित प्रेम मन्दिर अपनी भव्यता के लिये भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करता है वृन्दावन के कृपालुजी महाराज की परिकल्पना के अनुरुप 150 करोड़ रुपये की लागत से प्रेम मन्दिर का वर्ष 2011 में निर्माण कार्य पूर्ण हुआ। इटालियन सँगमरमर से बने इस भव्य मन्दिर में राजस्थान के कारीगरों ने आधुनिकता और प्राचीनता का समावेश किया है, जिसमें दक्षिण भारतीय शैली की भी झलक मिलती है। मन्दिर के बाहर और अन्दर सुन्दर नक्काशी की गई है। मन्दिर की वास्तुकला की एक विशेषता यह भी है कि इसके द्वार सभी दिशाओं में खुलते हैं। 54 एकड़ में फैले मन्दिर परिसर के मध्य विशाल प्रेम मन्दिर 125 फुट ऊँचा है। मन्दिर की लम्बाई 122 फुट और चौड़ाई 115 फुट है। मन्दिर 11 वर्षों में बनकर तैयार हुआ।

प्रेम मन्दिर, वृन्दावन 


भव्यता से परिपूर्ण आधुनिक भारत के इस विशाल मन्दिर के चारों ओर बने बगीचे और फव्वारें इसकी शोभा कई गुना बढ़ा देते हैं मन्दिर परिसर में हरियाली के बीच श्रद्धालुओं को भगवान कृष्ण की गिरिराजधरण लीला, झूलन लीला, कालियामर्दन लीला, महारास लीला के दर्शन होते हैं। प्रेम मन्दिर की परिकल्पना को गुजरात के शिल्पकार सोमपुरा परिवार ने मूर्तरुप दिया है। इसके निर्माण में राजस्थान और उत्तरप्रदेश के हजारों शिल्पकारों और मजदूरों ने 11 वर्ष तक अपना योगदान दिया।

प्रेम मन्दिर में विराजित श्री राधा-कृष्ण 

प्रेम मन्दिर में विराजित श्री राम-सीता 


जगद्गुरु कृपालु परिषद् के प्रणेता कृपालुजी महाराज ने प्रेम मन्दिर का शिलान्यास 14 फरवरी 2001 को मकर संक्रान्ति के अवसर पर किया था। मन्दिर के प्रवेश द्वारों पर अष्ट मयूरों के नक्काशीदार तोरण बने हैं। बाहरी दीवारें भगवान राधाकृष्ण की लीलाओं के मनोरम दृश्यों से सजी हैं। वहीं मन्दिर की दीवारों पर श्री कृष्ण की लीलाओं के साथ ही कृपालुजी महाराज के विभिन्न मुद्राओं में चित्र उकेरे गये हैं। मन्दिर के अन्दर की दीवारों को तराशकर बृज मण्डल की पौराणिकता को दर्शाया गया है। मन्दिर में 94 कलात्मक स्तम्भ हैं, जिसमें किङ्करी और मञ्जरी सखियों के अतिरिक्त भगवान राधाकृष्ण के साथ अष्ट सखियों के मन्त्रमुग्ध करने वाले दृश्य हैं। दीवारों पर मार्बल की स्लेटों पर कृपालुजी महाराज द्वारा रचित राधा गोविन्द गीत के दोहे अंकित हैं। मन्दिर के प्रथम तल पर भगवान सीताराम के अति शोभायमान विग्रह प्रतिष्ठित किये गये हैं। मन्दिर के दूसरे तल पर भगवान राधाकृष्ण के चेतन विग्रह प्रतिष्ठित हैं। इसके अलावा मन्दिर के गर्भ गृह में भगवान राधाकृष्ण और सीताराम के चल विग्रह भी विराजित हैं। इन चल विग्रहों का प्रति वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी, राधाष्टमी, राम नवमी के दिन पञ्चामृत से अभिषेक पुजारियों द्वारा किया जाता है। वृन्दावन स्थित प्रेम मन्दिर की भव्यता और कलाकृति को देखने के साथ मन्दिर के गर्भ गृह में विराजित भगवान के दर्शन करने के लिए देश- विदेश से लाखों श्रद्धालु प्रतिवर्ष आते हैं।

रात्रि समय रंगीन रौशनी से सरोबार प्रेम मन्दिर




प्रेम मन्दिर के जन सम्पर्क अधिकारी अजय त्रिपाठी ने बताया की इटालियन श्वेत सँगमरमर से बने मन्दिर में रख-रखाव और सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है, इसीलिए मन्दिर में सिर्फ फूलों की होली का आयोजन होता है। होली के दिन मन्दिर श्रद्धालुओं के लिए बन्द रहता है।

प्रेम मन्दिर में दर्शन का समय 


प्रेम मन्दिर में दर्शन का ग्रीष्म और शीत ऋतु में निर्धारित समय -

प्रात: - 5:30 से 6:30 तक
मध्याह्न - 8:30 से 12:00 तक
संध्या - 4:30 से 8:30 तक


फाउंटेन का समय -

ग्रीष्म ऋतु (01 अप्रेल से 30 सितंबर)  -
संध्या - 07:30 से 08:00 तक
शीत ऋतु (01 अक्टूबर से 31 मार्च)
संध्या - 07:00 से 07:30 तक 








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