गुरुवार, 27 फ़रवरी 2020

भारत के प्रमुख शनि मन्दिर

देशभर में शनि देव को समर्पित कई मन्दिर स्थापित हैं। भगवान कृष्ण की लीला स्थली वृन्दावन के निकट कोसीकलाँ सहित देश के विभिन्न राज्यों में 7 प्रमुख मन्दिर हैं, जहां देशभर से श्रद्धालु अपनी आस्था लेकर शनि देव का पूजन करने और अपने जीवन में आयी परेशानियों को दूर करने के लिये प्रार्थना करने आते हैं। न्याय प्रिय कहे जाने वाले शनि देव की वक्र दृष्टि का भय हर किसी को सताता है। यह भी माना जाता है कि शनि देव भक्तों पर जल्द ही प्रसन्न हो जाते हैं और भक्तों की गलतियों को क्षमा कर देते हैं।

शनि शिंगणापुर, महाराष्ट्र


भगवान शनि के सबसे प्रमुख मन्दिरों में से एक महाराष्ट्र के शिंगणापुर नामक गांव में शनि मन्दिर प्रतिष्ठित है। यह शनि मन्दिर महाराष्ट्र के अहमदनगर से लगभग 35 कि.मी. की दूरी पर है। इस मन्दिर की विशेषता यह है कि यहां पर शनि देव की मूर्ति खुले आसमान के नीचे है। इस मन्दिर में कोई छत नहीं है। शनि देव मन्दिर के साथ-साथ शिंगणापुर गाँव भी देश के अन्य गाँव से खास है। शिंगणापुर गाँव के किसी भी घर में ताला नहीं लगाया जाता है और ही यहाँ कभी चोरी की घटना होती है। लोगों में ऐसी मान्यता है कि शिंगणापुर गाँव पर हमेशा शनि देव की कृपा बनी रहती है। यहां के सभी घरों की सुरक्षा स्वयं शनि देव करते हैं।
शनि शिंगणापुर

कोकिलावन धाम शनि मन्दिर, उत्तर प्रदेश  


उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के कोसीकलाँ क्षेत्र में शनि देव को समर्पित यह प्राचीन मन्दिर स्थापित है। मन्दिर क्षेत्र को कोकिलावन के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि कोकिलावन में शनि देव का पूजन और उसकी परिक्रमा करने से मनुष्य की सारी मनोकामनायें पूर्ण हो जाती हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार बृज मण्डल की सीमा के समीप कोकिलावन में भगवान कृष्ण ने शनि देव को दर्शन दिये थे और वरदान दिया था कि जो भी मनुष्य पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ कोकिलावन की परिक्रमा करेगा उसे शनि देव कभी कष्ट नहीं पहुचायेंगे।


त्रिवेणी शनि मन्दिर, मध्य प्रदेश

मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित त्रिवेणी शनि मन्दिर 5000 वर्ष पुराना है। इस प्राचीन शनि देव मन्दिर की विशेषता यह है कि यहां शनि देव के साथ-साथ अन्य नवग्रह की मूर्तियाँ भी स्थापित हैं। इसलिये शनि मन्दिर को नवग्रह मन्दिर भी कहा जाता है। शनि भक्त और शनि के प्रकोप विशेषतः शनि की ढैय्या से प्रभावित लोग सुदूर क्षेत्रों से शनि मन्दिर में दर्शन करने आते हैं। इस मन्दिर के पास से ही शिप्रा नदी बहती है जिसे त्रिवेणी संगम भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है की मन्दिर में स्थापित शनिदेव की मूर्ति को राजा विक्रमादित्य ने स्थापित किया था। 


इंदौर का शनि मन्दिर, मध्य प्रदेश
मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में शनिदेव का मन्दिर शनिदेव के अन्य मन्दिरों से अलग है, क्योंकि यहां पर शनिदेव का 16 शृङ्गार किया जाता है। इंदौर के जूनी इंदौर क्षेत्र में स्थापित यह शनि मन्दिर अपनी प्राचीनता और चमत्कारी किस्सों के लिये प्रसिद्ध है। सामान्य तौर पर शनिदेव के लगभग सभी मन्दिरों में उनकी प्रतिमा काले पत्थर की बनी होती है जिन पर कोई शृङ्गार नहीं होता, लेकिन यह एक ऐसा मन्दिर है जहां शनिदेव का आकर्षक शृङ्गार किया जाता है। शोभायमान पोशाक भी धारण करायी जाती है। इस मन्दिर में शनिदेव बहुत ही सुन्दर रूप में नजर आते हैं।

शनिश्चरा मन्दिर, मध्य प्रदेश
मध्यप्रदेश के ग्वालियर शहर में स्थित शनि मन्दिर भारत के पुराने शनि मन्दिरों में से एक है। कहा जाता है कि मन्दिर में विराजित शनि पिण्ड प्रभु हनुमान ने लंका से फेंका था जो यहां आकर गिरा था। तब से शनिदेव यहीं पर स्थापित हैं। यहां शनिदेव को तेल चढ़ाने के बाद उनसे गले मिलने की प्रथा भी है। जो भी यहां आता है वह बड़े प्यार से शनि देव से गले मिलकर अपनी तकलीफें उनसे बाँटता है। कहा जाता है कि ऐसा करने से शनिदेव उस व्यक्ति की सारी परेशानी दूर कर देते हैं।
कष्टभंजन हनुमान मन्दिर, गुजरात
गुजरात में भावनगर के सारंगपुर में प्रभु हनुमान का एक प्राचीन मन्दिर है। जिसे कष्टभंजन हनुमानजी के नाम से जाना जाता है। यह मन्दिर अपने आप में ही खास है क्योंकि इस मन्दिर में भगवान हनुमान के साथ शनिदेव विराजित हैं। इतना ही नहीं यहां पर शनिदेव स्त्री रूप में हनुमान के चरणों में बैठे दिखाई देते हैं। इस मन्दिर को लेकर कहा जाता है कि यदि किसी भी भक्त की कुण्डली में शनि दोष हो तो कष्टभंजन हनुमान के दर्शन और पूजा-अर्चना करने से सभी दोष समाप्त हो जाते है।

कष्टभंजन हनुमान मन्दिर

तिरुनल्लार शनिश्वरभगवान स्थलम, कारइकाल  

देश के प्रमुख शनि मन्दिरों में से एक तिरुनल्लार शनिश्वरभगवान स्थलम तमिलनाडु के नवग्रह मन्दिरों में शामिल है। शनि देव को समर्पित दक्षिण भारत का यह प्रसिद्ध मन्दिर पुदुच्चेरी के कारइकाल  में स्थित है। भारत में स्थित शनि देव के प्रमुख मन्दिरों में से एक तिरुनल्लार शनिश्वर मन्दिर के बारे में मान्यता है कि इस मन्दिर में भगवान शिव की पूजा करने से शनि ग्रह के सभी बुरे प्रभावों से मुक्ति मिल जाती है।

तिरुनल्लार शनिश्वरभगवान स्थलम


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