शनिवार, 15 फ़रवरी 2020

वृन्दावन की विधवायें होली के लिये बना रहीं मन्दिर में चढ़ावे के पुष्पों से सुगन्धित गुलाल

वृन्दावन में भगवान कृष्ण की भक्ति के रँग में रँगी विधवा माताओं द्वारा होली के त्यौहार के लिये फूलों से गुलाल रँग तैयार किया जा रहा है। चैतन्य विहार स्थित महिला आश्रय सदन में निवासरत महिलायें बृज गन्धा प्रसार समिति की देखरेख में फूलों से रँग बना रही है।

वृन्दावन के सुप्रसिद्ध बाँकेबिहारी मन्दिर में श्रद्धालुओं द्वारा अपने आराध्य ठाकुर बाँकेबिहारी को फूल और फूलों से बनी मालायें चढ़ाये जाने के बाद जिन फूलों कि कोई उपयोगिता नहीं रह जाती, उन विसर्जित फूलों से कई रँग का गुलाल बनाया जा रहा है। महिला आश्रय सदन में रह रही महिलाओं में से लगभग 40 विधवा और व्रद्ध मातायें टोलियों में रँग बनाने का कार्य कर रहीं हैं। आश्रम में निवासरत विशाखा विश्वास और अन्नु हलधर ने बताया कि गुलाल रँग बनाने में गेंदा, गुलाब, चमेली और रायबेल के फूलों का उपयोग किया जा रहा है। मन्दिर द्वारा समय-समय पर करीब 20 से 80 किलो फूल महिला आश्रय सदन में लाये जा रहे हैं।

गुलाल को अन्तिम रूप देती महिलायें 


ऐसे बनता है गुलाल


मन्दिर से आये फूलों को महिलाओं द्वारा छटायी कर अलग-अलग किया जाता है। इसके बाद उन फूलों को सुखाया जाता है। सूख जाने के बाद फूलों को बारीक पीसकर हर्बल रँग डालकर सुगन्धित गुलाबी, पीला, केसरिया, हरे रँग का गुलाल तैयार किया जाता है। गर्मियों में मन्दिरों से महिला आश्रय सदन में फूल अधिक मात्रा में आते हैं, क्योंकि गर्मियों के समय में वृन्दावन के मन्दिरों में ठाकुरजी को शीतलता देने के लिये फूल बंगला प्रतिदिन बनाये जाते हैं। फूल बंगला में उपयोग किया गया फूल सुगन्धित और सफेद और गुलाबी रँग के ज़्यादातर होते हैं जो कि गुलाल तैयार करने में ज्यादा उपयोगी होते हैं। महिला आश्रय सदन में जिला प्रोवेशन अधिकारी की देखरेख में बृज गन्धा प्रसार समिति द्वारा प्रशिक्षण और उत्पादन केन्द्र संचालित किया जा रहा है। समिति के समन्वयक विक्रम शिवपुरी  विधवा और वृद्ध माताओं को प्रशिक्षण देकर स्वावलम्बी बनाने का कार्य कर रहे हैं। 

फूलों की छटायी करती वृन्दावन स्थित आश्रम में विधवा महिलायें 


महिला आश्रय सदन के प्रभारी संतोष मिश्रा ने बताया की विधवा माताओं द्वारा मन्दिर से आये फूलों से सुगन्धित गुलाल रँग बनाया जा रहा है। अधिक से अधिक और उपयोगी फूल मन्दिरों से आश्रम आये इसके भी प्रयास किए जा रहे हैं। प्रति वर्ष की तरह इस वर्ष भी बृज के मन्दिरों में हर्बल गुलाल से होली खेली जायेगी। विधवा माताओं द्वारा बनाये गुलाल के अलावा मन्दिर से ठाकुरजी पर चढ़ने के बाद आश्रम आने वाले फूलों से धूप बत्ती, अगरबत्ती और इत्र भी बनाया जा रहा है।


कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें