गुरुवार, 6 फ़रवरी 2020

भगवान राधामाधव का धूमधाम से मना कल्याण उत्सव


पुष्पों से सजी पालकी में सेवकों ने भगवान को मन्दिर में कराया भ्रमण



वृन्दावन के चैतन्य विहार स्थित राधामाधव दिव्य देश मन्दिर में चल रहे ब्रह्मोत्सव के अन्तर्गत भगवान राधामाधव का कल्याण उत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर सम्पूर्ण मन्दिर परिसर को पण्डितों व सेवकों द्वारा पुष्पों से सजाया गया। दक्षिण भारतीय वाद्ययन्त्रों की धुनों के मध्य आचार्यों ने भगवान राधामाधव का विधिविधान पूर्वक विवाह संस्कार कराया। भगवान के विवाह उत्सव के दर्शन के लिये देर रात तक देशी-विदेशी भक्त कल्याण महोत्सव में उपस्थित रहे।


कल्याण उत्सव में रजत और स्वर्ण जड़ित पालकी में विराजित भगवान राधामाधव 


बुधवार शाम कल्याण उत्सव के उपलक्ष्य में सेवकों और भक्तों ने गेंदे, गुलाब, माकरेट आदि सुगन्धित पुष्पों से मन्दिर को द्वार से लेकर गर्भ गृह तक सजाया। मन्दिर में फूलों के झूमर लगाये गये और द्वारों पर पुष्प और आम के पत्तों की तोरण लगायी गयी। मन्दिर के स्थानीय कलाकार गर्भ गृह के बाहर वाद्ययन्त्र थाविल और ओट्टू बजा रहे थे।

राधामाधव दिव्य देश मन्दिर में आयोजित कल्याण उत्सव के अवसर पर पुष्प बंगला में विराजित भगवान राधामाधव 


मन्दिर के गर्भ गृह में विराजित भगवान राधामाधव के विशाल मनमोहक विग्रह का स्वामी अनन्ताचार्य महाराज के सानिध्य में आचार्यों द्वारा सोने और चाँदी के आभूषणों से शृङ्गार किया गया। वहीं भगवान राधामाधव के चल विग्रह का मन्त्रोंच्चारों के मध्य अभिषेक करने के पश्चात् शृङ्गार किया गया। गर्भ गृह से बाहर विशाल हॉल में पुष्पों से सजी एक पालकी पर राधारानी के विग्रह को विराजमान किया गया और दूसरी पालकी में भगवान माधव को विराजमान किया गया। सेवक पालकियों को भगवान के जयकारों के मध्य मन्दिर के गोपुरम द्वार से होते हुये मन्दिर परिसर में ही बनाये गये पण्डाल में ले गये। जहां मन्दिर के आचार्यों ने भगवान का विवाह संस्कार कराया। यह आयोजन देर रात तक चलता रहा। इससे पूर्व मन्दिर में स्नपन तिरुमंजन, हवन, मंगलाशासन और प्रवचन का आयोजन किया गया।

मन्दिर के प्रबन्धक देवराज तिवारी ने बताया की मन्दिर में आयोजित 14वें ब्रह्मोत्सव में आज दक्षिण भारतीय आचार्यों ने कल्याण उत्सव विधि-विधान पूर्वक पूरे उत्साह के साथ मनाया है। बड़ी संख्या में देशी-विदेशी भक्त भी इस उत्सव में पूरे उत्साह के साथ शामिल हुये। मन्दिर में यह ब्रह्मोत्सव वर्ष में एक बार होता है। 



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