बुधवार, 12 फ़रवरी 2020

महा शिवरात्रि पर रँगेश्वर महादेव शीश पर धारण करेंगे पुष्पों का सेहरा

रँग भूमि मथुरा के मध्य स्थित प्राचीन रँगेश्वर महादेव मन्दिर में 21 फरवरी को होने वाले महा शिवरात्रि पर्व की तैयारी की जा रही है। शिवरात्रि पर्व की शाम को भगवान रँगेश्वर महादेव का विशेष शृङ्गार किया जायेगा और भगवान को पुष्पों का सेहरा धारण कराया जायेगा। मध्य रात्रि में महा आरती की जायेगी। 

रंगेश्वर महादेव, मथुरा 


मन्दिर के सेवायत बाबा वासदेव नाथ पुजारी ने बताया की महा शिवरात्रि पर्व से एक दिन पहले मन्दिर को शिव भक्तों के स्वागत में गेन्दा, गुलाब, रायबेल आदि सुगन्धित पुष्पों से सजाया जायेगा। शिवरात्रि से एक दिन पहले ही गुरुवार से काँवड़ यात्री जल लेकर मन्दिर आयेंगे और भगवान रँगेश्वर का अभिषेक और पूजन करेंगे। भक्तजन भगवान शिव का आक के फूल, धतूरा, बिल्वपत्र, चन्दन से पूजन करने के बाद धूप और दीप जलायेंगे। यह क्रम 21फरवरी की शाम तक निरन्तर चलेगा। शाम को मन्दिर के सेवायत लेखनाथ पुजारी द्वारा भगवान रँगेश्वर महादेव का शृङ्गार किया जायेगा। उनके सिर पर पुष्पों का सेहरा बांधा जायेगा। महा शिवरात्रि को रातभर जागरण होगा। सेवायत द्वारा निर्धारित समय पर पाँच आरतियाँ की जायेंगी। मध्यरात्री 12 बजे रँगेश्वर की महा आरती की जायेगी।

महा शिवरात्री पर 21 फरवरी को होने वाली आरतियों का समय -


सुबह 4:00 बजे - मङ्गला आरती
दोपहर 1:00 बजे – शृङ्गार आरती
शाम 5:00 बजे – संध्या आरती
मध्यरात्रि 12:00 बजे - महा आरती

22 फरवरी को प्रात: 5:00 बजे मङ्गला आरती


रँग भूमि में ऐसे प्रकट हुये भगवान रँगेश्वर महादेव


मन्दिर के बाबा वासदेव नाथ पुजारी ने भगवान रँगेश्वर महादेव के रँग भूमि में प्रकट होने की लीला के बारे में बताया कि द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने जब रँग भूमि मथुरा में कंस को मारा था तब भगवान कृष्ण और उनके बड़े भाई बलराम के बीच एक प्रश्न उठा की आखिर कंस को किसने मारा? दोनों भाई एक-दूसरे से बहस करने लगे कि कंस को मैंने मारा। तभी झगड़ा होता देख भगवान शिव पाताल से निकल आये और भगवान कृष्ण और बलराम की ओर संकेत करते हुये बोले की रँग है, रँग है, रँग है। दोनों भाइयों ने भगवान शिव से पूछा की कंस को किसने मारा तो भगवान शिव ने जवाब दिया की भगवान कृष्ण और बलराम दोनों ने मिलकर कंस को मारा। कृष्ण ने छल से और बलराम ने बल के प्रयोग से कंस को मारा है। तभी भगवान कृष्ण और बलराम ने भगवान शिव का नाम रँगेश्वर महादेव रख दिया और तभी से भगवान रँगेश्वर महादेव मथुरा में विराजित हो गये।

काँवड़ शिव भक्तों का एक मनोरथ


काँवड़ शिव भक्तों के लिए एक मनोरथ है। जिसे शिव भक्त अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर या मनोकामना पूर्ण करने के उद्देश्य से इस मनोरथ को करते हैं। इस मनोरथ में शिव भक्त अपने कन्धों पर यमुना या गंगा नदी से काँच या प्लास्टिक की जलहरि में भरकर जल पैदल चलकर मन्दिर लाते हैं। जलहरि को मन्दिर लाने के दौरान कोई दूसरा कार्य नहीं करते हैं। नदी से मन्दिर तक भक्तजन पैदल आते हैं। काँवड़ लेकर चलने वाले भक्त को कावड़ियाँ कहा जाता है।

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