बुधवार, 19 फ़रवरी 2020

ठाकुर राधावल्लभ लाल कमर में फेंटा बान्धकर भक्तों को देंगे दर्शन

 25 फरवरी फुलैरा दौज को प्रात: ठाकुरजी के होंगे विशेष दर्शन 


बृज के मन्दिरों में त्यौहार आते ही सैकड़ों साल पुरानी धर्म परम्पराओं के निर्वाह का सिलसिला शुरु हो जाता हैं। मन्दिर के गोस्वामी और ठाकुरजी के अनन्य भक्तों की अपने आराध्य के प्रति प्रगाढ़ आस्था और ठाकुरजी की प्राचीन समय से चली आ रही सेवाओं का बोध मन्दिरों की धर्म परम्पराओं के निर्वाह करने के भाव को और भी गहरा कर देता है। ऐसे ही राधावल्लभ मन्दिर में फाल्गुन माह शुक्ल द्वितीया को होली की परम्परा का निर्वहन होगा। 

                                              ठाकुर राधावल्लभ लाल 

वृन्दावन के राधावल्लभ मन्दिर में फाल्गुन शुक्ल द्वितीया जिसे बृज में फुलैरा दौज के नाम से भी जाना जाता है, में ठाकुर राधावल्लभ लाल कमर में फेंटा बान्धकर भक्तों को दर्शन देंगे। यह विशेष दर्शन 25 फरवरी को सुबह के समय होंगे। जन-जन के आराध्य ठाकुर राधावल्लभ लाल के वर्ष में एक बार होने वाले विशेष दर्शन के लिए मन्दिर में भक्तजन सुदूर क्षेत्रों से आयेंगे। फाल्गुन शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि यानि फुलैरा दौज को मन्दिर ठाकुर राधावल्लभ लाल का विशेष शृङ्गार किया जायेगा, जिसमें ठाकुरजी कमर में फेंटा बान्धेंगे और कपड़े पोटली में गुलाल रँग लेकर कमर में बन्धे फेंटा में लगायेंगे। तभी से ही मन्दिर में गोस्वामीजनों द्वारा बड़ा ढप बजाना शुरू हो जायेगा। ढप के साथ ही वह होली के पदों और धमार का गायन करेंगे। 

होली के पद - 

एक सखा हो- हो करै एक करें कछु उल्टी रीत। 
मधुमंगल नाचत चल्यौ गावत है फागुन के गीत॥ 
ताल पखावज बाजहीं बाजत रुंज मुरज सहनाइ। 
डफ दुन्दुभी अरु झालरी रह्यौ कुलाहल सौ ब्रज छाइ॥
सैनन ही में साँवरे कह्यौ सबन सौं  यों समुझाइ। 
आज भैया या साज सौं खेलै बरसाने में जाइ॥ 

मन्दिर के सेवायत मोहितमराल गोस्वामी ने बताया कि ठाकुरजी की यह सेवा और प्राचीन परम्परा के पीछे भक्तों का भाव है कि ठाकुरजी अपने ग्वाल-बाल, सखा और गोपियों के साथ बृज में होली खेलने के लिए तैयार होते हैं। वह होली खेलने के लिए कमर में फेंटा बान्ध लेते हैं। यह विशेष दर्शन साल में सिर्फ एक बार होते हैं। फुलैरा दौज के लिए मन्दिर में तैयारी शुरू कर दी गयी हैं। ठाकुरजी की विशेष पोशाक,पटुका और  मन्दिर के बड़े ढप को तैयार कराया जा रहा है। 

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