गुरुवार, 12 मार्च 2020

वृन्दावन के दक्षिण भारतीय शैली के रंगजी मन्दिर में 10 दिवसीय ब्रह्मोत्सव शुरु हुआ

भगवान गोदारंगमन्नार ने स्वणजड़ित पूर्णकोठी पर विराजमान होकर किया नगर भ्रमण

मन्दिरों की नगरी वृन्दावन में दक्षिण भारतीय शैली के रंगजी मन्दिर में दस दिवसीय ब्रह्मोत्सव का शुभारम्भ गुरुवार को धूमधाम के साथ हुआ। ब्रह्मोत्सव के पहले दिन भगवान गोदारंगमन्नार ने स्वर्ण जड़ित पूर्णकोठी नामक विमान पर विराजमान होकर नगर भ्रमण किया। इस अवसर पर भगवान के दर्शन के लिये भक्तों का तांता लगा रहा। दक्षिण भारतीय भक्त और मन्दिर के सेवकों ने यात्रा में पड़ने वाले विभिन्न मार्गों पर रँगोली बनाकर अपने आराध्य का स्वागत किया।

पूर्णकोठी में विराजमान भगवान गोदारंगमन्नार

दक्षिण भारतीय शैली के विशाल रंगजी मन्दिर में गुरुवार को प्रात: ब्रह्मोत्सव का शुभारम्भ आचार्यों ने मन्दिर परिसर के मध्य में स्थित गरुण स्तम्भ का पूजन करके और उसके ऊपर ध्वजा लगाकर किया। इस गरुण स्तम्भ को स्थानीय भक्तजन सोने का खम्बा भी कहते हैं। इसके पश्चात् भगवान गोदारंगमन्नार स्वर्ण जड़ित पूर्णकोठी पर विराजमान होकर नगर भ्रमण को निकले। राजशाही अन्दाज में निकले भगवान के दर्शन के लिये मन्दिर के द्वार पर ही भक्तजन एकत्र हो गये थे। दक्षिण भारतीय वाद्ययन्त्र नादस्वरम और थाविल की सुमधुर ध्वनियों के मध्य भगवान की सवारी चुंगी चैराहा से होकर रंगजी के बगीचा पहुंची। यात्रा के दौरान भगवान की सवारी के आगे-आगे रामानुज सम्प्रदाय का तिलक लगाये हाथी मदमस्त चाल से भगवान की अगुवाई कर रहा था। इसके पीछे दक्षिण भारतीय आचार्य ऊंचे स्वरों में मन्त्रोच्चार करते हुये चल रहे थे। भगवान गोदारंगमन्नार की सवारी के पीछे भक्तजन प्रार्थना करते हुये चल रहे थे। रंगजी के बगीचे में कुछ समय विश्राम के पश्चात् भगवान की सवारी पुन: रंगजी मन्दिर पहुंची। साल में एक बार होने वाले ब्रह्मोत्सव में भगवान गोदारंगमन्नार के दिव्य दर्शन कर हर भक्त अपने को धन्य मान रहा था।

                                  गरुण स्तम्भ की पूजा करते मन्दिर के आचार्य 
रंगजी मन्दिर की परम्परा अनुसार, भगवान गोदारंगमन्नार के ब्रह्मोत्सव के शुभारम्भ से एक दिन पहले उनके सेनापति विष्वक्सेन जी की सवारी निकाली गयी। मान्यतानुसार सेनापति विष्वक्सेन जी ब्रह्मोत्सव के लिये की गई व्यवस्थाओं को परखने के लिये चाँदी के विमान पर सवार होकर ब्रह्मोत्सव के एक दिन पहले निकलते हैं। सेनापति विष्वक्सेन मन्दिर से चाँदी की पालकी में विराजित होकर रंगजी मन्दिर से गन्तव्य स्थल रंगजी के बगीचा तक पहुँचे और ब्रह्मोत्सव की तैयारी व यात्रा के मार्ग का अवलोकन किया। यह सवारी भी दक्षिण भारतीय वाद्ययन्त्रों की धुनों के मध्य निकाली गयी। सवारी के आगे-आगे वेदपाठी ब्राह्मणों द्वारा वैदिक मन्त्रोच्चार किया जा रहा था।
चांदी के विमान पर विराजमान भगवान के सेनापति विष्वक्सेन 


रंगजी मन्दिर के स्वामी रघुनाथजी ने बताया कि दस दिवसीय ब्रह्मोत्सव में प्रतिदिन भगवान गोदारंगमन्नार यानि गोदा-रंगनाथ भगवान विभिन्न सोने व चाँदी से जड़ित विमानों पर विराजमान होकर मन्दिर से रंगजी के बगीचे तक जायेंगे, कुछ समय के विश्राम के बाद वह बगीचे से पुन: मन्दिर आयेंगे। भगवान की इन सवारियों का क्रम प्रात: और संध्या दोनों समय चलेगा।



1 टिप्पणी: