सोमवार, 2 मार्च 2020

बरसाना के राधारानी मन्दिर में 3 मार्च को होगी अनौखी लड्डू होली

बृज के मन्दिरों में 3 मार्च फाल्गुन शुक्ल अष्टमी तिथि से होलिकाष्टक लगते ही होली की धूम मचेगी। जहाँ बरसाने के श्रीजी मन्दिर यानि राधारानी के मन्दिर में द्वापर युगीन होली फिर साकार होगी,जिसमें लड्डू की होली खेली जायेगी। वहीं वृन्दावन के प्राचीन राधारमण मन्दिर में भगवान गर्भगृह से बाहर आकर चाँदी से जड़ित सिंहासन पर विराजमान होंगे। मन्दिर के गोस्वामीजन होली गायन के बीच भक्तों पर गुलाल बरसायेंगे।
लड्डू दुनियाभर में शगुन के प्रतीक हैं। किसी खुशी और उत्सव के मौके पर लोग लड्डू खाते और खिलाते हैं। उन्ही लड्डू से बरसाना के राधारानी मन्दिर में बृजवासी होली खेलेंगे। राधारानी यानि लाड़लीजी के मन्दिर में नन्दगाँव से आये पाण्डेजी को खाने के लिये दिये गये लड्डुओं की बरसात होगी। इस अनोखी होली के साक्षी बनने के लिये देश ही नहीं विदेशों से भी धर्म सैलानी आयेंगे।

द्वापर युग में ऐसे शुरुआत हुयी लड्डू की होली

लड्डू होली की मान्यता के बारे में बरसाना के गिरधारीलाल श्रोत्रिय ने बताया कि द्वापर युग में राधारानी के पिता वृषभानजी ने नन्दगाँव में नन्दबाबा को कान्हा संग होली खेलने के लिये आने का न्यौता अपने पुरोहित यानि पाण्डेजी के द्वारा भेजा था। होली का न्यौता स्वीकारने के बाद नन्दबाबा ने अपने पुरोहित को वृषभान जी को उनका न्यौता स्वीकार करने का सन्देशा बरसाना भिजवाया। तब वृषभानजी ने नन्द गाँव से आये पुरोहित को आदर सत्कार में खाने के लिये लड्डू दिये। बस फिर क्या था बरसाने में पुरोहित का सन्देश कुछ ही समय में सभी को मालूम हो गया। बरसाना की गोपियाँ खुशी से झूम उठी और पुरोहित के कपोलों पर गुलाल लगाने लगीं। उस समय पाण्डेजी ने अपने पास गुलाल न होने पर खाने को दिये लड्डुओं को ही गोपियों के ऊपर फेंके, तभी से द्वापर युग की यह लीला लड्डू होली के रूप में चली आ रही है।  

राधारमण मन्दिर में होली मंगलवार से

वृन्दावन के प्राचीन सप्त देवालयों में से एक राधारमण मन्दिर में लगभग 450 साल से अधिक समय से चली आ रही परम्पराओं के अनुरूप होली पर्व मनाया जायेगा। मंगलवार फाल्गुन शुक्ल अष्टमी तिथि से 8 दिनों तक ठाकुर श्री राधारमण जी मन्दिर के गर्भगृह से बाहर जगमोहन यानि बरामदे में चाँदी के सिंहासन पर विराजित होकर भक्तों को दर्शन देंगे। राधारमण मन्दिर के गोस्वामी पद्मनाभ गोस्वामी ने बताया कि मन्दिर में संध्या के समय में भगवान के समक्ष गोस्वामीजन, भक्त और मन्दिर के सेवकों द्वारा होली के पदों का गायन ढप, मृदंग, झाँझ, मँजीरा की धुन के बीच किया जायेगा। कई रँग का गुलाल भक्तों पर बरसेगा।






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