बुधवार, 11 मार्च 2020

दाऊजी के हुरँगा में हुरियारिनों ने हुरियारों में लगाई पोतनों की मार

देवरों की शामत आयी, भाभियों ने खूब की पिटाई

हुरँगा आज मचौ दाऊजी मन्दिर में, हुरँगा आज मचौ...के स्वरों के बीच बुधवार चैत्र कृष्ण पक्ष द्वितीया तिथि को दाऊजी मन्दिर में विश्व प्रसिद्ध हुरँगे का आयोजन किया गया। पाण्डे समाज की कुल वधुओं और देवरों के बीच हुये इस हुरँगे में जब देवरों ने अपनी भाभियों से हँसी-ठिठोली कर उनके ऊपर बाल्टियों से भरकर रँग डालना शुरू किया तो भाभियों ने भी इसका भरपूर जवाब पोतनों से दिया। भाभियों ने न केवल देवरों के कपड़े फाड़ डाले बल्कि उन्हीं के फटे कपड़ों से पोतने बनाकर उन पर मारे। यह दृश्य बड़ा मनोहारी था।

दाऊजी मन्दिर में हुरँगा खेलते हुरियारे और हुरियारिनें
मन्दिर में उड़ता रँग-बिरँगा गुलाल और उसके नीचे हुरियारे रूपी देवरों पर पड़ रही पोतनों की मार, के इस नयनाभिराम दृश्य को देखने के लिये भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा। तड़-तड़ाहट और चर-चर की आवाज मन्दिर परिसर में साफ सुनाई दे रही थी। देश-विदेश से आये श्रद्धालु भी स्वयं को रोक न सके तो वे भी मार खाने के लिये  आगे आ गये। मन्दिर के पट खुलते ही बलदेव जी को होली खेलने का निमंत्रण दिया गया। इसी बीच हुरियारों के समूह मन्दिर प्रांगण में बने हौदों में भरे टेसू के फूलों से बने रँग को पिचकारियों और बाल्टियों में भर-भरकर हुरियारिनों और दर्शकों पर डालने लगे। हुरियारिनें उलहाना मारते हुये कह रहीं थीं कि होरी तोते जब खेलूं मेरी पहुंची में नग जड़वाय। 

दाऊजी मन्दिर 
हुरियारिनें रेवती और दाऊजी के झण्डे को हूरियारों से छीनने का प्रयास करतीं तो हुरियारे उसे ऊपर उठा लेते। झण्डा न मिलने पर हुरियारे हारी रे गोरी घर चली, जीत चले बृजबाल... गाकर उन्हें उकसाते। हुरियारिनें भी दूने उत्साह के साथ झण्डे की ओर लपकी और उसे छीन लिया। हारे रे रसिया घर चले, जीत चलीं ब्रजनारि... गाकर हुरियारिनों ने अपनी इस जीत का जश्न मनाया। आयोजन सम्पूर्णता की ओर अग्रसर होने लगा। इसी बीच नफीरी, ढोल, मृदंग की धुन पर चल रहा फाग गीत और रसिया गायन परिसर में मौजूद सभी भक्तों को रस से सराबोर कर रहा था। हुरियारिनों और हुरियारों ने गीतों की धुन पर जमकर नृत्य किया। समाज गायन ढप धरि दे यार परु की, जो जीवै सो खेले फाग... के साथ हुरँगे का समापन हुआ।



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