बुधवार, 11 मार्च 2020

धुलण्डी पर सोने, चाँदी, पुष्पों के डोलों में विराजे जन-जन के आराध्य

मन्दिरों में मेवाओं की ठण्डायी, गुंजिया, जलेबी, रसभरी का लगा भोग


बृज में धुलण्डी के दिन चहुंओर जहां बृजवासी होली की मस्ती में डूबे हुये हैं वहीं, वृन्दावन के ठाकुर बाँकेबिहारी मन्दिर और राधावल्लभ मन्दिर सहित अन्य मन्दिरों में जन-जन के आराध्य ने सोने, चाँदी और पुष्पों से सजे डोलों में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दिये। मन्दिर के सेवायत गोस्वामियों ने होली पर बृज में खास तरह के होली में बनाने वाले पकवानों और मेवाओं से बनीं ठण्डायी का भोग लगाकर भक्तों में वितरित की। 


भोग लगी ठण्डायी को वितरीत करते श्री बाँकेबिहारी मन्दिर के गोस्वामी

वृन्दावन के बाँकेबिहारी मन्दिर में चाँदी और सोने से जड़ित डोला में ठाकुर बाँकेबिहारी को गर्भ गृह से बाहर जगमोहन यानि बरामदे में विराजित किया गया। मन्दिर के सेवाधिकारी के.डी.गोस्वामी ने ठाकुरजी को चाँदी के पात्रों में केसर, गुलाबजल, इत्र सेवित किया। इसके पश्चात मन्दिर में देश विदेश से दर्शन करने आये भक्तों पर इत्र और गुलाबजल बरसाया। इसके पश्चात ठाकुर बाँकेबिहारी महाराज का गुंजिया, मठरी, सकलपारे, चन्द्रकला, रसभरी, जलेबी और दूध, मेवाओं से बनीं ठण्डायी का भोग लगाया साथ ही होरी यानि होली के पदों का गायन किया।
होरी के बाद स्वर्ण महल में विराजमान, फगुआ कूँ बाँट रहे सरजोरी है।
स्वर्ण जड़ित निकुञ्ज की मालान कु वीथिन में, रस सिन्धु रस राज करें सरवोरी है।
बाँसुरी की तानन ते चित्त सरावोर करें, यमुना तट खारन में अद्भुत यह जोरी है...


श्री राधावल्लभ मन्दिर में प्रसादी रँग से भरी पिचकारी चलाते गोस्वामी

वहीं श्री राधावल्लभ मन्दिर में ठाकुरजी को गर्भगृह से बाहर पुष्प और लता-पता से सजे डोला में विराजमान किया गया। चैत्र प्रतिपदा के दिन ठाकुर राधावल्लभ लाल ने युगल स्वरूप में भक्तों को दर्शन दिये। अपने आराध्य के नयनाभिराम दर्शन कर भक्तजन अपने को कृतार्थ मान रहे थे। 


धुलन्दी पर राधावल्लभ लाल के युगल स्वरूप में दर्शन

मन्दिर के गोस्वामियों ने भक्तों पर जमकर रँग और गुलाल बरसाया। इन मन्दिरों के अलावा वृन्दावन के सप्त देवालयों में भी ठाकुरजी ने डोलाओं में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दिये। 


चीर घाट क्षेत्र स्थित गम्भीरा में भी आचार्य श्री वत्स गोस्वामी के सानिध्य होली पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुये, जिसमें फूलों की होली भी खेली गयी। होली पर्व पर लघु भारत बने वृन्दावन के मन्दिरों में सुदूर क्षेत्रों से आये भक्तों ने होली के साथ भक्ति का भरपूर आनन्द लिया।   

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