शुक्रवार, 6 मार्च 2020

प्रिया प्रीयतम की सवारी के साथ वृन्दावन के मन्दिरों में जमकर बरसा रँग

बरसाना,नन्दगाँव के बाद मन्दिरों की नगरी वृन्दावन के सुप्रसिद्ध बाँकेबिहारी मन्दिर सहित अन्य मन्दिरों में अबीर, गुलाल के साथ टेसू के फूलों का रँग जमकर बरसा। मन्दिरों में होली खेलने से पूर्व लाखों भक्तों ने वृन्दावन की पंचकोसीय परिक्रमा की और भगवान राधाकृष्ण की सवारी में शामिल हुये। सवारी निकलने बाद मन्दिरों में होली का उल्लास छा गया, जिसमें देश-विदेश से आये लाखों शृद्धालु भक्ति के साथ होली के रँग में सराबोर हो गये।

प्रिया-प्रियतम की सवारी
वृन्दावन में फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी यानि रँगभरी एकादशी पर सर्व प्रथम लाखों श्रद्धालुओं ने मन्दिरों में होली खेलने से पहले राधे-राधे के बोलों के साथ वृन्दावन की पंचकोसीय परिक्रमा लगायी। इसके पश्चात दोपहर 2 बजे राधावल्लभ मन्दिर से प्रिया प्रियतम यानि राधाकृष्ण के स्वरूप घोड़ों की बग्घी में विराजमान होकर नगर भ्रमण को चले। बग्घी के आगे-आगे राधावल्लभ मन्दिर के गोस्वामी होली के पद और लोकगीत पारम्परिक शैली में गाते हुये चल रहे थे। बग्घी पर सवार राधाकृष्ण के स्वरूपों और उनके सेवकों द्वारा भक्तों पर जमकर अबीर, गुलाल बरसाया जा रहा था। भक्तजन होली की मस्ती में गुलाल को अपने आराध्य का प्रसाद समझ कर ग्रहण करते हुये नाचते, गाते आगे बढ़ रहे थे। हर कोई भक्त ठाकुर राधाकृष्ण का बरसाया हुआ गुलाल अपने ऊपर डलवाने को आतुर दिखा। महिलायें, बच्चे और वृद्ध सभी बरसते हुये अबीर गुलाल के बीच भाव नृत्य कर रहे थे।

राधावल्लभ मन्दिर के आचार्य योगेन्द्र वल्लभ गोस्वामी ने बताया कि रँगभरी एकादशी पर प्रिया-प्रियतम की सवारी के नगर भ्रमण करने की परम्परा प्राचीन समय से चली आ रही है। आराध्य प्रिय-प्रीयतम की सवारी निकालने के पीछे गोस्वामी और ब्रजवासियों का यह भाव है कि फाल्गुन कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को ठाकुर राधा कृष्ण वृन्दावन का भ्रमण कर सभी बृजवासियों, सखा, ग्वाल-बालों को होली खेलने के लिये बुलाते हैं और इस प्रिय प्रियतम की सवारी के निकलने के साथ ही वृन्दावन के मन्दिरों में टेसू के फूलों से बने रँग की होली शुरू होती है।

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