शनिवार, 7 मार्च 2020

श्रीकृष्ण जन्म स्थान में जमकर बरसा रँग, गुलाल, हुई लट्ठामार होली

रंगभरनी एकादशी पर श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर होली का आनन्द बरसा। बृज के कलाकारों ने रसिया, होली गीत और नृत्य प्रस्तुत कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। रावल गाँव से आये हुरियारे और हुरियारिनों ने लट्ठमार होली खेली। इस बीच श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर जमकर बरसे रँग और गुलाल से आसमान भी सतरँगी हो गया।

श्रीकृष्ण जन्म स्थान श्रीराधाकृष्ण की लीला का मंचन करते कलाकार
शुक्रवार को श्रीकृष्ण की जन्मभूमि लट्ठामार होली से पहले सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारम्भ कार्ष्णि गुरु शरणानन्द महाराज द्वारा श्रीराधाकृष्ण की युगल जोड़ी की आरती करके किया गया। इसके पश्चात होली के रँगों की बरसात के बीच श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में रावल गांव से आये हुरियारे और हुरियारिनों ने लट्ठामार होली खेली। हुरियारिनों की प्रेम पगी लाठियां हुरियारों पर बरसने लगी। हुरियारिनों की तेल में भीगी रँगबिरँगी लाठियों से बचने को ढाल लिये हुरियारे घुटने के बल बैठने को मजबूर हो गये। यहां आसमान से रँग और गुलाल की बरसात के बीच राधाकृष्ण की अलौकिक लीला का भाव देख देश-दुनिया से आये भक्त खुशी से झूम उठे। हर कोई कान्हा के प्रसादी रँग में रँग गया। हर ओर रँग बिरँगे उड़ते गुलाल से वातावरण होलीमय हो गया।

रँगों का आनन्द शाम तक बरसता रहा और कान्हा के भक्त हर पल आनन्द लूटते रहे। राजस्थान जैसलमेर के कलाकारों ने घूमर, काल बेलिया नृत्य और पानीपत के कलाकारों ने होली नृत्य की प्रस्तुति दी, वहीं श्याम लोक कला मंच के कलाकारों ने मयूर नृत्य दिखाया।

राजेश शर्मा ने रसिया मोर बन आयौ..., बरसाने की मोर कुटी पे मोर बन आयो गीत पर मयूर नृत्य प्रस्तुत किया। इसके अलावा बृज के कलाकारों ने मेरी चुनरी में लग गयौ दाग री ऐसो चटक रँग डारौ..., चारों धामों से निराला बृज धाम के दर्शन कर लेयौ जी... और ठाकुर हमरे रमण बिहारी हम हैं रमण बिहारी... भजन सुनाकर भक्तों को भावविभोर कर दिया।



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