सोमवार, 9 मार्च 2020

दिनभर पूजन के बाद जयकारों के बीच हुआ होलिका दहन

मथुरा के होली गेट सहित तिराहे-चौराहों पर होलिका के साथ भक्त प्रहलाद की मूर्तियाँ विराजित की गयी। महिलाओं ने परम्परागत तरीके से होलिका का पूजन करके आरती की। वहीं शाम को बृजवासियों ने भी होलिका की संध्या आरती करने के पश्चात देर रात जयकारों के मध्य होलिका दहन किया गया। 


                                    होली वाली गली में होलिका साथ में भक्त प्रहलाद

होलिकोत्सव समिति द्वारा होली गेट पर स्थापित की गयी होलिका का पूजन करने के लिये होली गेट और आस-पास क्षेत्रों की महिलायें घरों से पूजन करने के लिये पहुँचीं। महिलायें पूजन की थाली के साथ-साथ गाय के गोबर से बनीं गुलरी की माला  भी होलिका पूजन स्थल पर लेकर आयीं। पूर्ण श्रद्धा के साथ गुलरी की माला होलिका को अर्पित करने के पश्चात जल चढ़ान कर हल्दी, चावल से पूजन किया। कच्चे सूत को लेकर होलिका की परिक्रमा लगाकर आरती की। पूजन का यह सिलसिला प्रात: 10 बजे से शाम के 4 बजे तक चलता रहा। शाम 7 बजे प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी कार्ष्णि गुरु शरणानन्द द्वारा होलिका का मंत्रोच्चारों के मध्य पूजन कर आरती की। भक्तों ने होलिका और भक्त प्रहलाद के जयकारे लगाये। इस बीच होलीगेट पर बृज के कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गयी। लोगों ने होली की उमंग के बीच सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनन्द लिया। इसी समय मथुरा की होली गली, रँगेश्वर मन्दिर क्षेत्र, डेम्पियर नगर चौराहा सहित अन्य क्षेत्रों में भी भक्तों ने बड़े ही उत्साह के साथ होलिका की आरती की। 

                                              होलिका का पूजन करती महिलायें

मथुरा के प्रमुख होलिका स्थल होली गेट पर रात्रि 9 बजे होलिका दहन करके भक्तों ने परिक्रमा लगायी वहीं होली वाली गली में रात्रि 11 बजे होलिका दहन किया गया। होलिका दहन होते ही जयकारों की आवाज सुन लोग अपने-अपने घरों से निकालकर आये और होलिका दहन स्थल से आग लगी गुलरी अपने घरों को ले गये, उस जाली हुयी गुलरी से घरों में होलिका दहन किया। होलिका दहन के दौरान लोगों ने कच्चे चने और गेहूं की बलियों को आग में भूना। उन भुनी हुयी बलियों को आसपड़ौस के लोगों को देकर एक-दूसरे को होली की बधाइयाँ दी और गले मिले। 

मथुरा में होलिका दहन के दौरान गेहूँ की बाली भूनते लोग

होलिका पूजन कर रहीं भरतपुर गेट निवासी नीलम ने बताया कि होली भी बुरायी पर अच्छायी की जीत है। भक्त प्रहलाद को जलाकर कर मारने का प्रयास करने वाली होलिका बुआ खुद जल गयी और भगवान की कृपा से नारायण के परम भक्त प्रहलाद को कोई नुकसान नहीं हुआ।




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